दिल्ली बम धमाके की जांच कर रहीं सुरक्षा एजेंसियों ने गिरफ्तार आरोपी मुज़म्मिल शकील से पूछताछ की, जिसमें उसने चौंकाने वाले बयान दिए हैं. पूछताछ में खुलासा हुआ है कि मुज़म्मिल न केवल धमाके की साजिश में शामिल था, बल्कि उसने अपनी पहचान छिपाने के लिए 'सोनू सिंह' के नाम से डिजिटल कवर भी बना रखा था.

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जांच एजेंसियों के मुताबिक मुज़म्मिल शकील बेहद शातिर तरीके से काम कर रहा था. उसने सिग्नल (Signal) ऐप पर 'सोनू सिंह' नाम से एक फर्जी आईडी बनाई थी, ताकि वह सुरक्षा एजेंसियों की रडार से बच सके और हिंदू नाम का सहारा लेकर अपनी आतंकी गतिविधियों को अंजाम दे सके.

मुज़म्मिल शकील का प्रोफाइल सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय है उसने 2012-18 के बीच जम्मू के 'एकोम्स' से एमबीबीएस किया और बाद में श्रीनगर के SKIMS अस्पताल में काम किया. मेडिकल कॉलेज के दौरान वह कट्टरपंथी विचारधारा के संपर्क में आया और टेलीग्राम पर 'खाकसार' जैसे हैंडलर और सरहद पार बैठे आकाओं से जुड़ गया.

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आतंकी उमर संग मिलकर काम कर रहा था मुज़म्मिल साल 2022 में वह फरीदाबाद के अल-फलाह अस्पताल में सीएमओ (CMO) के पद पर काम करने लगा, जिसे उसने अपनी साजिशों का ठिकाना बनाया. आरोपी ने अपने बयान में स्वीकार किया है कि उसने अल-फलाह यूनिवर्सिटी में आतंकी असिस्टेंट प्रोफेसर उमर उन नबी के साथ मिलकर विस्फोटक तैयार करने का मॉड्यूल बनाया था. उमर यूनिवर्सिटी के बी-ब्लॉक के रूम नंबर 4 में केमिकल का परीक्षण करता था. जनवरी 2025 में मुज़म्मिल ने सोहना और नूंह से करीब 3 लाख रुपये खर्च कर 70 बोरी NPK खाद खरीदी थी, जिसका इस्तेमाल बम बनाने में होना था. इन्होंने एसीटोन और हाइड्रोजन पेरोक्साइड से TAPT तैयार किया था, जिसे फरीदाबाद के धौज गांव में छिपाकर रखा गया था.

अफगानिस्तान जाना चाहते थे मुज़म्मिल और उसके साथीपूछताछ में यह भी सामने आया है कि मुज़म्मिल और उसके साथी ट्रेनिंग के लिए अफगानिस्तान जाना चाहते थे. इसके लिए वे 2022 में तुर्की के इस्तांबुल भी गए, जहां उनकी मुलाकात 'डॉ. उकाशा' नाम के आतंकी हैंडलर से हुई. हालांकि, कड़ी सुरक्षा के कारण वे आगे नहीं बढ़ सके और 15 दिन बाद भारत लौट आए. मुज़म्मिल ने खुलासा किया कि उसकी तंजीम (संगठन) का मुख्य उद्देश्य देश के मौजूदा माहौल का फायदा उठाकर सांप्रदायिक दंगों के दौरान विस्फोटक हमलों को अंजाम देना था. 

सबको बांट रखी थी अलग-अलग जिम्मेदारीमुज़म्मिल ने विस्फोटक बनाने से लेकर फंड इकट्ठा करने तक की जिम्मेदारी अपने अलग-अलग साथियों में बांट रखी थी. सूत्रों ने बताया कि मुज़म्मिल ने एजेंसियों को बताया कि एक्सप्लोसिव बनाने का काम उमर को दिया गया था. NPK इकट्ठा करने का काम मुज़म्मिल को दिया गया था. पैसों की जवाबदारी मोहम्मद आदिल को दी गई थी और प्लानिंग और उसकी तैयारी का काम इरफान को सौंपा गया था.

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