नई दिल्ली:दिल्ली विधानसभा में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को मिले ‘भारत रत्न’ पुरस्कार वापस लेने का प्रस्ताव आया है. विधानसभा में एक विधायक की तरफ से पेश किए गए प्रस्ताव में कहा गया है कि राजीव गांधी 1984 सिंख दंगे में जिम्मेदार थे इसलिए उनसे भारत रत्न वापस लिया जाना चाहिए.
दरअसल आज दिल्ली विधानसभा में 1984 सिख दंगे के पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए एक संकल्प बहुमत से पास किया गया था. इस संकल्प के तीन महत्वपूर्ण बिंदु थे.
पहला बिंदु
1984 में सिक्कों को खोज खोज कर टायर डालकर जलाया गया, उनका कत्लेआम किया गया. ऐसे में दंगे शब्द का इस्तेमाल इस पूरी घटना को छोटा बनाता है. ऐसे में अब से ‘दंगे’ की जगह ‘नरसंहार’ शब्द का इस्तेमाल किया जाए.
दूसराबिंदु
दिल्ली सरकार दंगा पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए गृह मंत्रालय पर दबाव डाले.
तीसराबिंदु
1984 सिख दंगे का जिक्र करते हुए विधायक ने कहा, ‘’उस वक्त के प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने कहा था कि जब कोई बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिलती है और उनके इस बयान के बाद सिखों पर जिस तरीके से अत्याचार हुआ इसको देखते हुए हम यह मानते हैं कि राजीव गांधी इस पूरे घटनाक्रम के लिए जिम्मेदार थे, इसलिए दिल्ली विधानसभा दिवंगत प्रधानमंत्री राजीव गांधी से भारत रत्न वापस लेने की मांग भारत सरकार से करती है और इसके लिए संकल्प पास करते हैं.’’
अजय माकन ने आप को बीजेपी की बी टीम बताया
दिल्ली विधानसभा में पेश किए गए इस प्रस्ताव पर दिल्ली कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय माकन ने कहा है, ‘’राजीव गांधी ने देश के लिए अपना जीवन कुर्बान कर दिया. लेकिन इस प्रस्ताव से आम आदमी पार्टी का असली रंग खुलकर सामने आ गया है. हम हमेशा से यह बात कहते रहे हैं कि आम आदमी पार्टी बीजेपी की बी टीम है.’’
वहीं, आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता और विधायक सौरभ भारद्वाज ने ट्वीट करके इस मामले पर सफाई दी. उन्होंने कहा, ‘’यह प्रस्ताव पास नहीं हुआ है. यह व्यक्तिगत तौर पर पेश किया गया प्रस्ताव था, जिसपर अभी कोई फैसला नहीं हुआ है.’’
