नई दिल्ली: सीमा पर शांति के बावजूद भारत की सैन्य तैयारियां पूरी हैं लेकिन इन सैन्य तैयारियों से पड़ोसियों को डरने की जरुरत नहीं है. क्योंकि भारत ना केवल पाकिस्तान बल्कि चीन से भी शांति बनाना चाहता है. ये कहना है देश के रक्षा मंत्री मनोहर पर्रीकर का, जो आज बैंगलुरु में एयरोशो के उदघाटन के दौरान मीडिया से बातचीत कर रहे थे.

अच्छी बात है कि जनरल बाजवा अपने पड़ोसियों की इच्छा जानते हैं: परिर्कर रक्षा मंत्री के मुताबिक, वे पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल कमर वाजवा के उस कदम का स्वागत करते हैं कि जिसके बाद से सीमा पर शांति बनी हुई है. पर्रीकर ने कहा कि ये अच्छी बात है कि जरनल वाजवा अपने पड़ोसियों की इच्छाओं को अच्छे से जानते हैं. ये जवाब उन्होनें एक पत्रकार के उस सवाल पर दिया जिसमें कहा गया था कि जबसे पाकिस्तानी सेना की कमान जनरल बाजवा के हाथों में आई है सीमा पर शांति बनी हुई है. कहीं ऐसा तो नहीं इस शांति की आड़ में पाकिस्तान फिर से कोई बड़ी साजिश रच रहा हो?

चार दिन चलेगा एयरशो, 51 देशों के 70 फाइटर जेट हिस्सा लेंगे इससे पहले रक्षा मंत्री मनोहर पर्रीकर ने आज एशिया के सबसे बड़े एयरो शो, एयरो-इंडिया 2017 का आज बैंगलुरू में उदघाटन किया. चार दिनों तक (14-18 फरवरी) चलने वाले इस एयरो-शो में 279 विदेशी कंपनियों सहित कुल 549 कंपनियां शिरकत कर रहीं हैं. कुल 51 देशों के सैन्य अधिकारी, डेलीगेट्स सहित कुल 70 लड़ाकू विमान इस एयरोशो में शिरकत कर रहे हैं. चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी एयरफोर्स के 5 अधिकारी अपने देश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं. चीन की हिस्सेदारी पहले भी रही है, लेकिन पहली बार 5 बड़े अधिकारी इसमें शामिल हुए हैं.

फ्रांस का लड़ाकू विमान राफेल रहा खास आकर्षण का केंद्र एयरोशो में फ्रांस का लड़ाकू विमान राफेल खास आकर्षण रहा. भारत ने कुछ समय पहले ही फ्रांस की दसॉल्ट कंपनी से 36 रफाल विमानों की खरीद के लिए डील की है. इस सौदे की कीमत करीब 59 हजार करोड़ रुपये थी. रफाल के अलावा कई और लड़ाकू विमानों ने एयरोशो के पहले दिन आसमान में अपना दमखम दिखाया. इस कड़ी में स्वीडन का ग्रिपन और अमेरिका का एफ-16 शामिल था.

''100 और लड़ाकू विमानों की आवश्यकता है'' 36 रफाल लड़ाकू विमान के अगले तीन साल में भारतीय वायुसेना के जंगी बेड़े में शामिल होने के बावजूद वायुसेना ने हाल ही में कहा था कि देश और रिजनल सिक्योरिटी के मद्देनजर रफाल जैसे 100 और लड़ाकू विमानों की आवश्यकता है. वायुसेना की इस कमी को देखते हुए ही ग्रिपन और एफ-16 लड़ाकू विमानों का बेंगलूरू के एयरोशो में शिरकत करना काफी मायने रखता है.  एफ-16 विमान बनाने वाली अमेरिका की लॉकहीड मार्टिन कंपनी ने तो अपनी मैन्युफैक्चेरिंग यूनिट को भारत में ही शिफ्ट करने का प्रपोजल दिया है. भारत भी चाहता है कि विदेशी कंपनियां भारत में पार्टनर चुनकर विमानों का निर्माण करें. शो के दौरान इस ‘स्ट्रैटिजिक पार्टनरशिप’ की गाइडलाइंस का ऐलान भी हो सकता है.

राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोपरी: पर्रिकर पर्रीकर ने रक्षा क्षेत्र में एफडीआई के मुद्दे पर आरएसएस के विरोध पर कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोपरी है और जो कोई भी आरएसएस के साथ कोई मुद्दा है उसे सुलझा लिया जायेगा. समारोह के पहले दिन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रीकर के अलावा, नागरिक विमानन मंत्री अशोक गजपति राजू, रक्षा राज्यमंत्री सुभाषराव भामरे, नागरिक विमानन राज्यमंत्री जयंत सिन्हा और तीनों सेनाओं के प्रमुखों सहित देश-विदेश के सैन्य अधिकारी मौजूद थे.

स्वदेशी विमानों का भी प्रदर्शन इस मौके पर स्वेदशी विमान बनाने वाली कंपनी, हिंदुस्तान एरोनोटिक्स लिमिटेड यानि एचएएल ने अपने सभी स्वेदशी लड़ाकू विमान और हेलीकॉप्टर का प्रदर्शन दिखाया. इनमें हाल ही में वायुसेना में शामिल हुआ, हल्का लड़ाकू विमान, तेजस, ध्रुव, रुद और लाइट कॉम्बेट हेलीकॉप्टर शामिल थे.

रक्षा मंत्री ने सौंपा टोही विमान 'एवैक्स' एयरशो शो के दौरान ही डीआरडीओ द्वारा तैयार एवैक्स टोही विमान भी रक्षा मंत्री ने वायुसेना को सौंपा. अर्ली वॉर्निग एंड कंट्रोल सिस्टम नाम का. ये विमान आसमान में 400 किलोमीटर की रेंज में दुश्मन के लड़ाकू विमान, ड्रोन और मिसाइल को भांप लेने की क्षमता रखता है और फिर वायुसेना के जंगी बेड़े को अलर्ट जारी कर देता है. इस तरह का एवैक्स टोही विमान बनाने वाला भारत दुनिया का चौथा देश बन गया है. इससे पहले सिज्ञफ अमेरिका, स्वीडन और इजरायल के पास ही इस तरह के टोही विमान बनाने की तकनीक और क्षमता हासिल थी.