एआईएमआईएम (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने बांग्लादेश में हाल में हुए हिंसक विरोध प्रदर्शन पर चिंता जताई है. उन्होंने हिंदू व्यक्ति दीपू चंद्र दास की हत्या की निंदा की है. दीपू दास को हिंसक भीड़ ने पीट-पीटकर मौत के घाट उतार दिया था. ओवैसी ने इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया. साथ ही बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा की मांग की है. 

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भारत में कई जगह हुए थे विरोध प्रदर्शन

दीपू दास की मौत के बाद भारत में कई जगह प्रदर्शन देखने को मिले. इनमें दिल्ली, कोलकाता, मुंबई, हैदराबाद, मध्यप्रदेश के कुछ हिस्से और अगरतला में विरोध प्रदर्शन शामिल है. इस दौरान बांग्लादेश के दूतावास के बाहर भी भारतीयों को प्रदर्शन देखने को मिला. 

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'दीपू चंद्र दास की हत्या संवैधानिक जनादेश के उलट है'

ओवैसी ने कहा कि दीपू चंद्र दास की पीट-पीटकर हत्या करना बांग्लादेश के संवैधानिक जनादेश के उलट है. यह अनुच्छेद 41 के तहत धर्म की स्वतंत्रता की आजादी देता है. उन्होंने इस घटना की निंदा की है. न्यूज एजेंसी पीटीआई से बात करते हुए ओवैसी ने कहा, दीपू चंद्र दास के साथ जो हुआ, वह पूरी तरह से संवैधानिक जनादेश के विपरित है. यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. यह दुखद घटना है. हमारी पार्टी किसी भी तरह की लिंचिंग की निंदा करती है. 

'बांग्लादेश का निर्माण धर्मनिरपेक्ष की नींव पर हुआ था'

ओवैसी ने बताया, बांग्लादेश का निर्माण धर्मनिरपेक्ष बंगाली राष्ट्रवाद की नींव पर हुआ था. यहां एक बड़ी गैर मुस्लिम आबादी रहती है. बांग्ला भाषा बोलती है. अगर आप संविधान देखोगे, तो वहां आर्टिकल 41 धर्म की स्वतंत्रता की गारंटी दी गई है. आर्टिकल 27 और 28 कानून के सामने समानता को सुनिश्चित करते हैं. आर्टिकल 12 धर्मनिरपेक्षता को बनाए रखता है. 

इससे पहले उन्होंने कहा था कि बांग्लादेश के साथ संबंधों को मजबूत बनाए रखने के लिए भारत सरकार के उठाए गए कदमों का समर्थन करता है. भारत की सुरक्षा, खासकर पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए बांग्लादेश में स्थिरता महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा था, 'बांग्लादेश में एक लोकप्रिय क्रांति हुई है. हमें उम्मीद है, जब फरवरी में चुनाव होंगे, तो भारत-बांग्लादेश के बीच संबंध बेहतर रहेंगे.' 

बांग्लादेश में क्या हुआ था 18 दिसंबर को?

18 दिसंबर को बांग्लादेश में एक भीड़ ने दीपू दास की हत्या कर दी थी. इसने पूरी दुनिया को चौंका दिया था. इस घटना से भारत-बांग्लादेश में तनाव पैदा हो गया. इसको लेकर पूरे भारत में विरोध प्रदर्शन हुए. भारत के विदेश मंत्रालय ने चिंता जाहिर की थी.