Marital Rape: आजकल देश में एक चर्चा चली हुई है कि वैवाहिक रेप को अपराध माना जाए या नहीं. ये बहस अब और तेज हो गई है क्योंकि एनसीपी सांसद वंदना चव्हाण ने राज्यसभा में वैवाहिक बलात्कार को अपराध घोषित करने की मांग की है. चव्हाण ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान ऐसी घटनाओं में वृद्धि हुई है. जानिए दुनिया के देशों में वैवाहिक रेप को लेकर क्या कानून है और भारत में क्या मांग उठ रही है?

100 से ज्यादा देशों में वैवाहिक बलात्कार अपराध 

दुनिया के 100 से ज्यादा देशों में वैवाहिक बलात्कार अपराध माना जाता है. भारत उन 36 देशों में शामिल है, जहां ये अपराध की श्रेणी में नहीं है. महिलाओं के अधिकार और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए हिंदुस्तान में कई कड़े कानून बनाए गए हैं. लेकिन आईपीसी में वैवाहिक बलात्कार के लिए कोई धारा नहीं है.

आईपीसी की धारा 375 में बिना महिला की सहमति के बनाए गए सभी यौन संबंधों को बलात्कार कहा गया है. लेकिन आईपीसी की धारा 375 के अपवाद 2 में कहा गया है कि 15 साल से कम उम्र की पत्नी के साथ पति का यौन संबंध बलात्कार माना जाएगा.

जेएस वर्मा कमेटी ने भी अपराध की श्रेणी में डालने की सिफारिश की थी

लंबे समय से मांग होती रही है कि बिना पत्नी की सहमति के यौन संबंध को भी अपराध माना जाए भले ही पत्नी की उम्र 18 साल हो या 80 साल. संयुक्त राष्ट्र की महिलाओं के खिलाफ हिंसा पर बनी कमेटी (CEDAW) ने साल 2013 में भारत से वैवाहिक बलात्कार को अपराध बनाने की सिफारिश की थी. निर्भया रेप केस पर बनी जेएस वर्मा कमेटी ने इसे अपराध की श्रेणी में डालने की सिफारिश की थी.

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