राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने आरएसएस के वरिष्ठ पदाधिकारी दत्तात्रेय होसबोले के उस बयान का शनिवार को बचाव किया, जिसमें उन्होंने पाकिस्तान के साथ बातचीत के लिए एक विकल्प खुला रखने की बात कही थी. भागवत ने कहा कि होसबोले ने पड़ोसी देश के लोगों के संदर्भ में यह बात कही थी.

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दत्तात्रेय होसबोले ने पीटीआई को दिए एक इंटरव्यू में दिए गए बयान पर भागवत ने कहा कि संगठन पाकिस्तान के संबंध में केंद्र सरकार की नीति का पालन करेगा. उन्होंने आरएसएस के शताब्दी समारोह के तहत यहां आयोजित एक संवाद सत्र में कहा, 'लेकिन पाकिस्तान में ऐसे कई लोग हैं जो मानते हैं कि भारत का बंटवारा गलत था और वहां के कई पत्रकार आरएसएस और उसके काम की तारीफ़ करते हैं. वहां ऐसे लोगों की एक बड़ी संख्या है जो पाकिस्तान के खिलाफ और दो-राष्ट्र सिद्धांत के विरोध में हैं तथा कहते हैं कि साथ रहना बेहतर था.'

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अगर पाकिस्तान को हराना है तो बातचीत के दरवाजे खुले रखने होंगे- भागवत

भागवत ने कहा कि अगर भविष्य में भारत को पाकिस्तान को बुरी तरह हराना है, तो वहां के लोगों को या तो भारत में शामिल करना होगा या फिर उन्हें उसी देश में शांति से रहने लायक बनाना होगा और इसके लिए बातचीत के दरवाज़े खुले रखने होंगे.

उन्होंने कहा, 'हम हिटलर जैसे नहीं हैं. यह हमारा स्वभाव या तरीका नहीं है. इसलिए हमें कोई न कोई रास्ता खुला रखना चाहिए. हमें अन्याय और अत्याचार को खत्म करना चाहिए, लेकिन जो अच्छा है, उसे भी बचाकर रखना चाहिए.'

दत्तात्रेय होसबोले ने क्या कहा था?

आरएसएस के महासचिव दत्तात्रेय होसबाले ने कहा था कि भारत को पाकिस्तान के साथ संवाद के दरवाज़े पूरी तरह बंद नहीं करने चाहिए. में हमेशा उनसे बातचीत करने के लिए तैयार रहना चाहिए. यही कारण है कि राजनयिक संबंध बनाए रखे जाते हैं. व्यापार जारी रहता है और वीजा दिए जाते हैं. इन्हें बंद नहीं किया जाना चाहिए. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि आतंकवाद के प्रति कड़े रुख़ में कोई नरमी नहीं बरतनी चाहिए.

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