CRUDE OIL CRISIS: भारत में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, भाजपा ने वैश्विक संकट का दिया हवाला
वैश्विक तेल संकट के बीच भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में सिर्फ 3% बढ़ोतरी हुई. भाजपा ने दावा किया कि कई देशों के मुकाबले भारत में आम जनता पर सबसे कम बोझ डाला गया.

Crude Oil Price: भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में चार साल बाद बढ़ोतरी देखने को मिली है. सरकार और भाजपा ने इस फैसले का बचाव करते हुए कहा है कि वैश्विक तेल संकट के मुकाबले भारत में बढ़ोतरी बेहद सीमित रखी गई है. पेट्रोल और डीजल के दाम में तीन-तीन रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की गई है. भाजपा का दावा है कि दुनिया के कई देशों में ईंधन की कीमतों में भारी उछाल आया है, लेकिन भारत में इसका असर काफी कम रखा गया.
भाजपा आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही थीं. इसके बावजूद भारत ने करीब 76 दिनों तक आम लोगों पर अतिरिक्त बोझ नहीं डाला. सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने इस दौरान बढ़ी हुई लागत का बड़ा हिस्सा खुद उठाया. उन्होंने दावा किया कि तेल कंपनियों को रोजाना लगभग एक हजार करोड़ रुपये तक का नुकसान हो रहा था.
मालवीय के मुताबिक पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में संकट की वजह से ब्रेंट क्रूड लंबे समय तक 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना रहा. इसका असर दुनिया की लगभग हर बड़ी अर्थव्यवस्था पर पड़ा. कई देशों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 20 से 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई. कुछ जगहों पर यह बढ़ोतरी 90 प्रतिशत तक पहुंच गई.
भाजपा ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि पाकिस्तान में ईंधन की कीमतें करीब 55 प्रतिशत तक बढ़ चुकी हैं. मलेशिया में 56 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई. वहीं अमेरिका में भी तेल की कीमतों में लगभग 45 प्रतिशत का उछाल देखा गया. इसके मुकाबले भारत में पेट्रोल की कीमत करीब 3.2 प्रतिशत और डीजल की कीमत 3.4 प्रतिशत ही बढ़ी है.
भाजपा नेताओं का कहना है कि भारत ने वैश्विक संकट के बीच संतुलित फैसला लिया. उनका दावा है कि अगर समय रहते कीमतों में सीमित बढ़ोतरी नहीं की जाती, तो तेल कंपनियों पर आर्थिक दबाव और ज्यादा बढ़ सकता था. पार्टी ने यह भी कहा कि ईंधन की कीमतों का सीधा असर महंगाई, ट्रांसपोर्ट, खाद्य सामग्री और घरेलू बजट पर पड़ता है. इसलिए सरकार ने बेहद सावधानी के साथ फैसला लिया.
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी हाल ही में लोगों से ईंधन बचाने की अपील की थी. उन्होंने मेट्रो सेवाओं का इस्तेमाल बढ़ाने. कारपूलिंग अपनाने. इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने और वर्क फ्रॉम होम जैसी व्यवस्था को उपयोगी बताया. भारत सरकार इससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम करना चाहती है .
भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कांग्रेस पर राजनीतिक अवसरवाद का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया ऊर्जा संकट से जूझ रही है. लेकिन भारत में आम जनता पर सबसे कम बोझ डाला गया है. भाजपा ने इसे मोदी सरकार की आर्थिक रणनीति और संतुलित नीति का हिस्सा बताया है.
























