कर्नाटक में एक बार फिर से इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) बनाम बैलेट पेपर को लेकर सियासी बहस तेज हो गई है. भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कड़े विरोध के बावजूद राज्य के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने स्थानीय निकाय चुनावों में बैलेट पेपर से मतदान की वापसी के लिए अहम संशोधन विधेयक विधानसभा में पेश कर दिया है.

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राज्य सरकार के मंत्री प्रियंक खड़गे ने कर्नाटक ग्राम स्वराज और पंचायत राज (संशोधन) विधेयक, 2026 को सदन में पेश किया. इस विधेयक में प्रस्ताव रखा गया है कि स्थानीय चुनावों में EVM के बजाय फिर से बैलेट पेपर का उपयोग किया जाए.

सरकार के कदम पर विपक्ष की जताई तीखी आपत्ति

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इस कदम को लेकर विपक्ष ने तीखी आपत्ति जताई है और इसे राजनीतिक फैसला बताया है. वहीं, राज्य सरकार का कहना है कि यह पहल चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और जनता के भरोसे को मजबूत करने के उद्देश्य से लाई गई है. इस मुद्दे पर अब सियासी घमासान बढ़ने के आसार हैं और आने वाले दिनों में यह बहस और तेज हो सकती है.

कर्नाटक राज्य चुनाव आयोग ने बैलेट पेपर की इस्तेमाल पर क्या कहा?

कर्नाटक राज्य चुनाव आयोग के आयुक्त जी. एस. संग्रेषी ने घोषणा की थी कि ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (GBA) के तहत आने वाले पांच नगर निगमं के चुनाव 25 मई, 2026 के बाद और 30 जून, 2026 से पहले कराए जाएंगे और इस बार होने वाले स्थानीय निकाय चुनावों में ईवीएम की जगह बैलेट पेपर का इस्तेमाल किया जाएगा.

तीन दशक के बाद राज्य में बैलेट पेपर का होगा इस्तेमाल

कर्नाटक राज्य चुनाव आयुक्त जी. एस. संग्रेषी ने कहा कि बेंगलुरु में ईवीएम का पहली बार इस्तेमाल तीन दशक पहले साल 1996 में किया गया था. इसके बाद से राज्य में होने वाले प्रत्येक चुनाव में ईवीएम के जरिए कराया गया, लेकिन करीब तीन दशक बीत जाने के बाद एक बार फिर से चुनाव में पारंपरिक कागज के बैलेट पेपर का इस्तेमाल किया जाएगा.

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