लद्दाख के करगिल जिले में अज्ञात लोगों की तरफ से मुहर्रम के बैनर और दूसरे धार्मिक प्रतीकों का कथित तौर पर अपमान करने और उन्हें शहर से गुजरने वाली सुरू नदी में फेंकने के बाद गुस्सा और विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया है.

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क्या है पूरा मामला? 

1 मुहर्रम को हरदास थांग पुल पर झंडे, बैनर, पवित्र धार्मिक झंडे (अलम-ए-हुसैन) और दूसरे धार्मिक प्रतीक लगाए गए थे. 17 और 18 जून की रात को अज्ञात शरारती तत्वों ने इनका अपमान किया और अगली सुबह स्थानीय लोगों ने इन्हें बरामद किया. जैसे ही शहर में इस कथित अपमान की खबर फैली, बड़ी संख्या में निवासी विरोध में सड़कों पर उतर आए और दोषियों की पहचान करने और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की.

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प्रशासन ने बुलाई इमरजेंसी बैठक

इस घटना के बाद, करगिल के चीफ एग्जीक्यूटिव काउंसलर (CEC) फिरोज खान ने - जो सिविल प्रशासन का प्रतिनिधित्व करते हैं - लद्दाख पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों और भारतीय सेना के साथ मिलकर, हरदास थांग पुल पर अलम-ए-हुसैन के अपमान के मामले पर स्थिति पर चर्चा करने के लिए धार्मिक प्रतिनिधियों और स्थानीय नागरिकों के साथ तुरंत एक आपातकालीन बैठक बुलाई.

बैठक के दौरान, अधिकारियों ने बताया कि यह घटना अंधेरे की आड़ में ऐसे इलाके में हुई जहां CCTV कवरेज नहीं था. इससे स्थानीय लोगों का गुस्सा और बढ़ गया. उनका आरोप है कि मुहर्रम के महीने में जिले में सांप्रदायिक तनाव भड़काने की गहरी साजिश रची गई है.

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लोगों का आरोप- शांति भंग करने वालों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा

वहीं, धार्मिक नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि अधिकारियों और जनता के बीच का रिश्ता अटूट है, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि शांति भंग करने वाली ऐसी बुरी हरकतों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए, घटना के बाद CEC ने लद्दाख पुलिस और सेना के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे उस जगह पर तुरंत CCTV कैमरे लगाएं, रात में गश्त बढ़ाएं और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए औपचारिक FIR दर्ज करें. इसके अलावा, अधिकारियों ने जनता से शांति बनाए रखने और अफवाहें न फैलाने की अपील की है.

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