कांग्रेस ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली से जुड़ी कथित अनियमितताओं को लेकर शनिवार को कहा कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का पद पर बने रहना सत्ता की उनकी निर्लज्ज लालसा को दर्शता है. 

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पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि मंत्री प्रधान एक समझौतावादी मंत्रालय चलाने वाले एक अहंकारी और अक्षम व्यक्ति के रूप में बेनकाब हुए हैं. रमेश ने एक खबर का हवाला देते हुए 'एक्स' पर पोस्ट किया, 'शिक्षा मंत्रालय के राज तेज़ी से एक के बाद एक सामने आते जा रहे हैं. आज, हमें पता चला कि कोएम्पट (कॉन्ट्रेक्टर) ने निविदा की साइबर सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए सीबीएसई को दो साइबर सुरक्षा प्रमाणपत्र प्रस्तुत किए.' 

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साइबर सुरक्षा खामियों पर सवाल

अब खबर है कि ये दोनों प्रमाणपत्र दूसरे ग्राहकों से जुड़े हुए थे. उनमें से एक की समय सीमा समाप्त हो गई थी और दूसरे का एक अस्थायी आवेदन के रूप में ऑडिट किया गया था.  उन्होंने दावा किया कि सीबीएसई ने इस धोखे को उजागर करने के बजाय कोएम्पट को बढ़ी हुई दरों पर ठेका दे दिया. उनका कहना है, ‘जैसा कि अब हम जानते हैं, जेन-जी एथिकल हैकर्स ने फरवरी 2025 में ही साइबर सुरक्षा में गंभीर खामियों को उजागर कर दिया था, जिसे सीबीएसई ने तब तक नकारा जब तक कि वह ऐसा करने में असमर्थ नहीं हो गया....’ 

धर्मेंद्र प्रधान पर तीखा हमला

जयराम रमेश ने कहा, 'यदि प्रधान के मंत्रालय ने सीबीएसई परीक्षाओं, ऑन स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) प्रणाली और पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया को सही से आगे बढ़ाने में अधिक ईमानदारी दिखाई होती, तो हम इस बुरी स्थिति से बच सकते थे जिसने लाखों छात्रों और उनके परिवारों को तनाव में डाल दिया है.' उन्होंने कहा, 'मंत्री प्रधान का पद पर बने रहना केवल सत्ता के लिए उनकी बेशर्म इच्छा को दर्शाता है. वह पूरी तरह से समझौतावादी मंत्रालय चलाने वाले एक अहंकारी और अक्षम व्यक्ति के रूप में बेनकाब हो गए हैं.'यह भी पढ़ेंCJP Protest: क्या अमेरिका ने अभिजीत दीपके के डिपोर्टेशन के बारे में बताया? दिल्ली में CJP के विरोध-प्रदर्शन से पहले सरकार से सवाल


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