कांग्रेस के दिग्गज नेता और केरल से सांसद शशि थरूर ने हाल ही में एक कार्यक्रम में कहा कि वैचारिक शुद्धता से राष्ट्र का निर्माण नहीं होगा. केंद्र और राज्य में भले ही अलग-अलग सरकारें हो, लेकिन आपस में सहयोग जरूरी है. हमें कभी-कभी विभिन्न विचारधाराओं के बीच भी सहयोग करने के लिए तैयार रहना चाहिए.

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शशि थरूर ने इसी सप्ताह दुबई में अमृता न्यूज के एक कार्यक्रम में कहा कि समस्या यह है कि अभी हमारी राजनीति ये मांग करती है कि हर किसी को वैचारिक रूप से शुद्धतावादी होना चाहिए, इसलिए हम दूसरे पक्ष में कोई योग्यता नहीं देखेंगे या दूसरे पक्ष के किसी व्यक्ति से बात नहीं करेंगे, जो स्वस्थ लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है. 

'प्रधानमंत्री की प्रशंसा करने का आरोप लगा'उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री के भाषण पर मेरे द्वारा की गई एक निष्पक्ष पोस्ट पर भी प्रधानमंत्री की तारीफ करने का आरोप लगाया गया है, जबकि मैंने प्रशंसा का एक शब्द भी नहीं कहा. मैंने तो बस भाषण का जिक्र किया था. मुद्दा यह है कि इस समय हमारे देश में ऐसा ही माहौल है. लोगों की दिलचस्पी सिर्फ़ वैचारिक शुद्धता में है, लेकिन आप इस तरह से काम नहीं करवा सकते. 

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'राज्य केंद्र के बीच सहयोग जरूरी'थरूर ने कहा कि किसी ने चुनाव जीता है और केंद्र में सरकार बनाई है और आपने अपने राज्य में चुनाव जीता है और सरकार बनाई है. अगर आपका राज्य केंद्र के साथ सहयोग नहीं करेगा तो आप कुछ भी काम कैसे करवा पाएंगे. मेरे विचार से, यह कोई मुश्किल काम नहीं है. आपको सचमुच कहना होगा कि सहयोग करना हमारे हित में है. यह हमारे लोगों के हित में है. भारत और केरल दोनों के नागरिकों के हित में है. 

उन्होंने आगे कहा कि हां, मैं सत्तारूढ़ दल से असहमत हूं, लेकिन वे सत्ता में हैं. उन्हें देश का जनादेश मिला है. मैं उनके साथ काम करूंगा. अगर वे कोई ऐसी योजना लेकर आते हैं, जिससे राज्य को पैसा मिले तो मैं अपनी मान्यताओं के दायरे में उसपर चर्चा करूंगा, ताकि मैं अपने राज्य के लिए पैसा ले सकूं. इस तरह का आपसी सहयोग सभी के बीच जरूरी है. 

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