चुनावी रोल की विशेष गहन समीक्षा यानी SIR को लेकर कांग्रेस ने चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है. कांग्रेस ने अपनी प्रदेश इकाइयों से कहा है कि वे 25 सितंबर को अपने-अपने राज्य चुनाव आयोग कार्यालय तक विरोध मार्च निकालें. पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और उनकी गिरफ्तारी की मांग की है.

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कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि सभी प्रदेश कांग्रेस कमेटियों को 25 सितंबर को बड़े विरोध मार्च निकालने के निर्देश दिए गए हैं. पार्टी ने ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल में लिए गए फैसलों और चुनावी रोल में किए गए बदलावों की स्वतंत्र और व्यापक समीक्षा की भी मांग की है.

28 सितंबर को जिला स्तर पर प्रदर्शन

कांग्रेस ने विरोध प्रदर्शन का अगला चरण 28 सितंबर को रखने की बात कही है. पार्टी के मुताबिक, उस दिन सभी जिला कांग्रेस कमेटियां अपने-अपने जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय तक मार्च निकालेंगी. वेणुगोपाल ने कहा कि पार्टी का विरोध तब तक जारी रहेगा, जब तक उसकी मांगों पर कार्रवाई नहीं होती. राहुल गांधी ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी और कहा कि इस मामले में न्याय होना चाहिए. ये कांग्रेस नेताओं के राजनीतिक बयान हैं और इन्हें आरोप व मांग के तौर पर ही देखा जाना चाहिए.

SIR को लेकर चुनाव आयोग के अंदर क्या हुआ?

यह विवाद 'द इंडियन एक्सप्रेस' की 23 सितंबर की एक रिपोर्ट के बाद और बढ़ा. रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार SIR और चुनावी रोल से जुड़े कुछ फैसलों पर औपचारिक आपत्तियां दर्ज की थीं. इनमें एक दिन में चार आपत्तियां दर्ज किए जाने की बात भी सामने आई. रिपोर्ट के अनुसार, दोनों चुनाव आयुक्तों ने कुछ फैसलों और आदेशों को लेकर सवाल उठाया और कहा कि वे उनकी जानकारी या मंजूरी के बिना लिए गए थे. उनकी आपत्तियों में नए मतदाताओं के लिए फॉर्म-6 में बदलाव, चुनावी डेटा तक अधिकारियों की पहुंच और मतदाता सूची से जुड़े कुछ फैसले शामिल थे.

फॉर्म-6 में बदलाव पर भी सवाल

'द इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के अनुसार, SIR से जुड़े सवालों को नए मतदाताओं के फॉर्म-6 में जोड़ा गया था. रिपोर्ट में बताया गया कि विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू ने इस बदलाव पर आपत्ति जताई थी और कहा था कि वैधानिक फॉर्म में बदलाव के लिए संबंधित नियमों में संशोधन की जरूरत है. रिपोर्ट के अनुसार, दोनों चुनाव आयुक्तों ने चुनावी डेटा के प्रबंधन और राज्य स्तर के अधिकारियों की पहुंच को लेकर भी चिंता जताई थी. उनका कहना था कि चुनावी रोल के डेटा तक पहुंच को लेकर व्यवस्था में बदलाव किए जा रहे थे.

चुनाव आयोग ने क्या कहा?

इन आरोपों के बीच चुनाव आयोग ने कहा है कि अलग-अलग राय निर्णय लेने की प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा हैं. आयोग ने 14 आपत्तियों के अस्तित्व और उनसे जुड़े रिकॉर्ड को खारिज नहीं किया, लेकिन यह स्पष्ट किया कि SIR से संबंधित अंतिम फैसले आयोग की सामूहिक प्रक्रिया के तहत लिए गए थे. इस तरह मौजूदा विवाद के दो प्रमुख पहलू हैं. एक तरफ कांग्रेस इन आंतरिक आपत्तियों को आधार बनाकर CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रही है. दूसरी तरफ चुनाव आयोग का कहना है कि आयोग के भीतर अलग-अलग राय होना निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा है. अब कांग्रेस के 25 सितंबर के प्रस्तावित विरोध मार्च और उसके बाद 28 सितंबर के जिला स्तर के प्रदर्शनों पर नजर रहेगी. SIR से जुड़े चुनावी रोल और चुनाव आयोग के भीतर दर्ज आपत्तियों को लेकर आगे की कार्रवाई भी इस विवाद में महत्वपूर्ण होगी.