कांग्रेस में संगठनात्मक फेरबदल की तैयारियां तेज हो गई हैं. राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के साथ संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने प्रदेशों के सह प्रभारियों के साथ बैठक कर संगठन की मौजूदा स्थिति और चुनावी तैयारियों पर विस्तृत चर्चा की. राहुल गांधी का जोर इस बात पर रहा कि पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए.

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सूत्रों के मुताबिक, पार्टी के राष्ट्रीय सचिवों के चयन और संगठन को मजबूत करने की रणनीति को लेकर कांग्रेस नेतृत्व लगातार बैठकों और ग्रुप डिस्कशन के जरिए नेताओं का आकलन कर रहा है. सूत्रों के अनुसार, 10 जनपथ में हुई बैठक के दौरान राहुल गांधी ने प्रदेशों के संगठनात्मक कामकाज, चुनावी रणनीति और प्रदेश नेतृत्व के बीच तालमेल को लेकर कई अहम सवाल पूछे. राहुल गांधी ने नेताओं से जानना चाहा कि उनके राज्यों में प्रदेश प्रभारी और प्रदेश अध्यक्ष के बीच किस तरह का कोऑर्डिनेशन है और संगठन को मजबूत करने के लिए जमीन पर अब तक क्या कदम उठाए गए हैं.

राहुल गांधी ने पूछे संगठन और चुनावी रणनीति से जुड़े सवाल

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बैठक में राहुल गांधी ने प्रदेशों के सह प्रभारियों से ये भी पूछा कि चुनाव के दौरान कांग्रेस ऐसा कौन सा काम नहीं कर पाई. जिसे बेहतर तरीके से किया जा सकता था. उन्होंने प्रदेश प्रभारियों और सह प्रभारियों के बीच तालमेल, प्रदेश अध्यक्षों के अब तक के कामकाज और संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के उपायों पर भी जानकारी ली. सूत्रों के मुताबिक, बैठक में प्रदेशों की वास्तविक स्थिति, नेतृत्व के बीच समन्वय और चुनावी तैयारियों से जुड़े मुद्दों पर रिपोर्ट ली गई.

प्रियंका गांधी ने बेहतर कोऑर्डिनेशन पर दिया जोर

बैठक में प्रियंका गांधी ने प्रदेश प्रभारी और सह प्रभारियों के बीच बेहतर तालमेल को जरूरी बताया. उन्होंने संगठन के प्रभावी संचालन के लिए आपसी समन्वय और टीमवर्क पर जोर दिया. सूत्रों के मुताबिक बैठक के दौरान कुछ प्रदेशों के सह प्रभारियों ने प्रभारी के साथ उचित कोऑर्डिनेशन नहीं होने की शिकायत भी रखी. कुछ नेताओं ने आरोप लगाया कि कई प्रभारी अपनी मर्जी के मुताबिक काम करते हैं, जिससे संगठनात्मक तालमेल प्रभावित होता है.

7 सितंबर से शुरू हुआ ग्रुप डिस्कशन, 135 नेताओं का इंटरव्यू

कांग्रेस में राष्ट्रीय सचिवों के चयन और संगठनात्मक फेरबदल की प्रक्रिया के तहत 7 सितंबर से ग्रुप डिस्कशन की शुरुआत हुई थी. सूत्रों के अनुसार, अब तक करीब 135 नेताओं के इंटरव्यू लिए जा चुके हैं. इस प्रक्रिया में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल की भूमिका अहम बताई जा रही है.

जानकारी के मुताबिक राष्ट्रीय सचिव बनने के इच्छुक नेताओं के साथ इंटरव्यू और ग्रुप डिस्कशन के जरिए उनकी संगठनात्मक समझ राज्यों में काम करने की क्षमता और पार्टी को मजबूत करने की रणनीति का आकलन किया जा रहा है.

करीब 40 फीसदी राष्ट्रीय सचिवों को हटाए जाने की संभावना

सूत्रों के मुताबिक, संगठनात्मक फेरबदल के तहत कांग्रेस के करीब 40 फीसदी मौजूदा राष्ट्रीय सचिवों को हटाया जा सकता है. हालांकि, इस संबंध में अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व द्वारा लिया जाना बाकी है.

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कांग्रेस नेतृत्व की इस कवायद को संगठन में नई ऊर्जा लाने, जमीनी पकड़ मजबूत करने और राज्यों में बेहतर समन्वय स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. आने वाले दिनों में राष्ट्रीय सचिवों के चयन और संगठनात्मक बदलाव को लेकर तस्वीर और साफ हो सकती है.

सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस में संगठनात्मक बदलाव की यह प्रक्रिया लगातार जारी है और नेतृत्व का फोकस पार्टी को चुनावी चुनौतियों के लिए अधिक प्रभावी और मजबूत बनाने पर है.

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