नई दिल्ली: कांग्रेस पार्टी ने आर्थिक विकास दर (जीडीपी ग्रोथ रेट) के घटकर पांच फीसदी पहुंचने पर सरकार की तीखी आलोचना की है. पार्टी ने जीडीपी ग्रोथ रेट के पिछले सात साल के अपने न्यूनतम स्तर पर चले जाने को 'मोदी मेड डिजास्टर' करार दिया है. सरकार पर हमला करते हुए मुख्य विपक्षी पार्टी ने कहा कि अर्थव्यवस्था को ठीक करने की जगह सरकार ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है. पार्टी ने आरोप लगाया कि नीम-हकीम के सर्जन की भूमिका में आने से अर्थव्यवस्था का ऐसा हाल हुआ है.

रणदीप सुरजेवाला ने साधा निशाना 

कांग्रेस पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने दावा किया कि अर्थव्यवस्था की जो स्थिति दिख रही है उससे कहीं ज्यादा खराब है. उन्होंने ट्वीट कर कहा, "वित्तीय कुप्रबंधन और आर्थिक आपातकाल की स्थिति पूरी अर्थव्यवस्था में घर कर गयी है. जीडीपी का निराशाजनक डाटा इसका प्रकटीकरण भर है.'' उन्होंने दावा किया, ''बहरहाल, हालत जो दिखाई दे रही है उससे कहीं बड़ी है. पूरी तरह से आर्थिक मंदी है, विनिर्माण बंद हो चुका है, निर्यात कम हो रहा है और आयात बढ़ रहा है. इसके अलावा लाखों लोगों की नौकरियां चली गयी हैं.''

रणदीप सुरजेवाला ने कटाक्ष करते हुए कहा, "बीमार अर्थव्यवस्था से जुड़े ढांचागत मुद्दों का निवारण करने की बजाय बीजेपी सरकार 'मायोपिक' लच्छेदार हेडलाइन का प्रबंधन और अपनी नाकामी छुपा रही है. ये नीम-हकीम के सर्जन में तब्दील होने का एक बेहतरीन मिसाल है.''

कांग्रेस नेता ने इसे मोदी मेड आपदा बताया

इससे पहले पार्टी प्रवक्ता राजीव गौड़ा ने ट्वीट कर कहा, "जीडीपी विकास दर पांच फीसदी पर पहुंच गई. नोटबंदी, जल्दबाजी में जीएसटी लागू करने और अक्षमता के नतीजे लगातार दिख रहे हैं." उन्होंने तंज कसते हुए कहा, "यह गिरावट वैश्विक मुद्दों के कारण नहीं है. यह 'मोदी द्वारा पैदा की गई' (मोदी मेड) आपदा है." राजीव गौड़ा ने कहा, "क्या अर्थव्यवस्था की स्थिति और बुरी होगी, क्या ध्यान भटकाने के लिए नई-नई तरकीबें अपनाई जाएंगी."

बता दें कि देश की आर्थिक वृद्धि दर 2019-20 की अप्रैल-जून तिमाही में घटकर पांच फीसदी रह गयी. यह पिछले सात साल का न्यूनतम स्तर है. विनिर्माण क्षेत्र में गिरावट और कृषि उत्पादन की सुस्ती से जीडीपी वृद्धि में यह गिरावट आई है. शुक्रवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों में यह जानकारी दी गयी है. इससे पहले वित्त वर्ष 2012-13 की अप्रैल- जून अवधि में देश की आर्थिक वृद्धि दर सबसे निचले स्तर 4.9 फीसदी पर रही थी. एक साल पहले 2018-19 की पहली तिमाही में आर्थिक वृद्धि दर आठ फीसदी के उच्च स्तर पर थी, जबकि इससे पिछली तिमाही की बात की जाये तो जनवरी से मार्च 2019 की तिमाही में वृद्धि दर 5.8 फीसदी दर्ज की गई थी.

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