अभिषेक मनु सिंघवी बोले, 'अगर आप अच्छे फीस लेने वाले वकील नहीं हैं तो...'
कांग्रेस सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने वकीलों की फीस, मुफ्त कानूनी काम, EVM, चुनाव आयोग और वोटर लिस्ट को लेकर अपनी राय रखी.

कांग्रेस के राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने एबीपी न्यूज के कार्यक्रम चर्चा विद चित्रा में देश से जुड़े कई मुद्दों पर अपनी राय रखी. बातचीत के दौरान उनसे वकीलों की फीस, मुफ्त कानूनी काम, टैक्स, EVM, चुनाव आयोग और वोटर लिस्ट जैसे विषयों पर सवाल पूछे गए. सिंघवी ने इन सभी मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी. वकीलों की भारी फीस को लेकर पूछे गए सवाल पर अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि किसी वकील के काम और उसकी फीस के बीच संबंध को पूरी तरह गलत नहीं माना जा सकता.
अभिषेक मनु सिंघवी के मुताबिक अगर कोई वकील अच्छी फीस लेता है तो इसका एक कारण उसका अनुभव और काम करने की क्षमता भी हो सकती है. उन्होंने बताया कि उनके कुल काम का करीब 25 से 33 फीसदी हिस्सा बिना फीस के होता है. सिंघवी ने कहा कि कई बार ऐसे मामले सामने आते हैं, जिनमें वह पैसे नहीं लेते. कुछ मामलों में उन्हें फीस लेने का अवसर नहीं मिलता और कुछ मामलों में वह खुद फीस लेने के इच्छुक नहीं होते. सिंघवी ने यह भी दावा किया कि पिछले करीब 10 वर्षों से वह देश में सबसे ज्यादा टैक्स देने वाले लोगों में शामिल रहे हैं.
अभिषेक मनु सिंघवी ने बताया 'महंगा' वकील होने क्यों ज़रूरी!
— ABP News (@ABPNews) September 5, 2026
'चर्चा with चित्रा' में कांग्रेस नेता @DrAMSinghvi EXCLUSIVE #CharchaWithChitra #Congress #AbhishekManuSinghvi #ABPNews | @chitraaum pic.twitter.com/FBST8Y4Cap
EVM और चुनाव प्रक्रिया पर उठाए सवाल
इंटरव्यू में चुनाव व्यवस्था और EVM को लेकर भी अभिषेक मनु सिंघवी ने अपनी राय रखी. उन्होंने कहा कि चुनाव प्रक्रिया और उससे जुड़े संस्थानों की विश्वसनीयता में जिस तरह की गिरावट वह महसूस करते हैं, वैसी स्थिति पिछले 15 वर्षों में पहले नहीं देखी गई. सिंघवी ने कर्नाटक और महाराष्ट्र समेत कई चुनावों का उदाहरण देते हुए चुनाव प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि कई घटनाओं के बाद उनके मन में चुनाव प्रक्रिया को लेकर संदेह पैदा हुआ है. उन्होंने यह भी कहा कि सिर्फ यह सवाल पूछना पर्याप्त नहीं है कि अगर चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ी है तो विपक्ष चुनाव जीतता कैसे है. सिंघवी के मुताबिक चुनाव जीतने के लिए चुनाव आयोग और पूरी चुनाव प्रक्रिया में समान अवसर मिलना जरूरी है.
वोटर लिस्ट में नाम हटने को लेकर जताई चिंता
वोटर लिस्ट में नाम हटाए जाने के मुद्दे पर भी सिंघवी ने गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने दावा किया कि अगर 13 करोड़ लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं, तो यह समझना जरूरी है कि इसका चुनाव पर क्या असर पड़ सकता है. महाराष्ट्र में वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने और हटाने को लेकर सामने आए विवाद का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वह यह दावा नहीं कर रहे हैं कि हर चुनाव में ऐसा होता है. हालांकि, जहां किसी चुनाव के नतीजे को लेकर पहले से ही सवाल उठते हैं, वहां मतदाता सूची में बड़े बदलाव संदेह पैदा कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में किसी बड़े स्तर पर नाम हटने या जुड़ने की प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट जवाब और जांच जरूरी है, ताकि चुनाव प्रक्रिया पर लोगों का भरोसा बना रहे.
चुनाव में ‘साम, दाम, दंड, भेद’ के इस्तेमाल का आरोप
अभिषेक मनु सिंघवी ने सत्तारूढ़ दल पर गंभीर आरोप भी लगाए. उन्होंने कहा कि जहां सत्ता में मौजूद पार्टी किसी भी कीमत पर जीत हासिल करने का फैसला कर लेती है, वहां उनके अनुसार अलग-अलग तरीकों का इस्तेमाल किया जाता है. सिंघवी ने इसके लिए ‘साम, दाम, दंड, भेद’ का जिक्र किया. उनका कहना था कि विधानसभा, लोकसभा और अलग-अलग राज्यों के चुनावों में सामने आए कुछ परिणामों को लेकर अब भी ऐसे सवाल हैं, जिनका संतोषजनक जवाब नहीं मिला है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कई मामलों में चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाने वालों को अपने दावों के पर्याप्त प्रमाण रखने का अवसर नहीं दिया जाता. हालांकि, ये सभी बातें सिंघवी की ओर से इंटरव्यू के दौरान रखे गए राजनीतिक आरोप और उनकी व्यक्तिगत राय हैं.





















