विजय सरकार ने यू-टर्न लेते हुए छात्रों के विरोध-प्रदर्शन पर रोक लगाने वाला आदेश वापस ले लिया. डायरेक्टरेट ऑफ कॉलेजिएट एजुकेशन (DCE) की ओर से जारी ये उपाय वामपंथी पार्टियों और तमिलनाडु कॉकरोच जनता पार्टी  आयोजित कार्यक्रमों को ध्यान में रखकर किए गए थे. तमिलनाडु सरकार के इस फैसले को कॉकरोच जनता पार्टी ने गैर- संवैधानिक बताते हुए विरोध किया था.

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24 घंटे में वापस लिया आदेश

विजय की तमिलनाडु सरकार ने स्कूल, कॉलेज, पुलिस और जिला प्रशासन को यह निर्देश दिया था कि वे छात्रों को प्रदर्शनों और आंदोलनों में शामिल होने से रोकने के उपाय करें. हालांकि, बाद में सरकार ने अपनी इस गलती को सुधारा और 24 घंटे के भीतर ही इस निर्देश (ऑर्डर) को वापस ले लिया. कॉलेज शिक्षा निदेशालय (DCE) द्वारा जारी इन उपायों का मकसद वामपंथी (Left-wing) दलों और 'तमिलनाडु कॉकरोच जनता पार्टी' द्वारा आयोजित कार्यक्रमों को रोकना था.

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क्यों वापस लिया आदेशजब तमिलनाडु में नीट को लेकर प्रदर्शन चल रहे थे तब सीजेपी और लेफ्ट से जुड़े छात्र संगठन विरोध प्रदर्शन कर रहे थे. ऐसे में छात्रों को प्रोटेस्ट से दूर रखने के लिए विजय सरकार ने ये आदेश दिया था. हालांकि जब ये राजनीतिक मुद्दा बन गया तो उन्होंने इस आदेश को वापस लेने का फैसला किया.

पिछले हफ्ते चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि छात्रों को विरोध-प्रदर्शन करने का मौलिक अधिकार (मूल अधिकार) है, भले ही उनके विचार या राय गलत ही क्यों न हों. उन्होंने यह भी बताया कि वे खुद भी अपने छात्र जीवन में छात्र गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल रहे हैं. 

75 हजार का कर्ज किया माफ

तमिलनाडु सरकार ने हाल ही में किसानों को बड़ा तोहफा दिया है. उन्होंने 75 हजार तक सहकारी कृषि लोन को पूरी तरह से माफ करने की घोषणा की है. सीएम विजय ने कहा कि कि कृषि राज्य की रीढ़ है और देश की समृद्धि किसानों के समर्थन पर निर्भर करती है. 

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