पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार (13 जनवरी, 2026) को राज्य में हाल ही में हुए एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर निशाना साधा है. उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा है कि चुनाव आयोग भाजपा की कठपुतली की तहत काम कर रहा है और बिना कारण बताए मनमाने ढंग से नामों को वोटर लिस्ट से हटा रहा है.

Continues below advertisement

उन्होंने कहा कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त यह कैसे तय कर सकते हैं कि मतदाता सूची का आधा हिस्सा हटाया जाए और किसकी सरकार बननी चाहिए. एसआईआर के दौरान, चुनाव आयोग ने उन विवाहित महिलाओं के नाम हटा दिए, जिन्होंने उपनाम बदल लिए थे. उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग व्हाट्सएप पर चल रहा है, SIR के नियमों में दिन में कई बार बदलाव हो रहे हैं.

SIR के कारण अब तक 84 लोगों की मौत: CM बनर्जी

Continues below advertisement

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एसआईआर को लेकर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा, ‘आज सुबह तक 84 लोगों की मौत हो चुकी है. 4 लोगों ने आत्महत्या की और 17 लोगों की मौत SIR का नोटिस मिलने के बाद ब्रेन स्ट्रोक या हार्ट स्ट्रोक से हुई. चुनाव आयोग को इन सभी मौतों की जिम्मेदारी लेनी चाहिए. भाजपा को इन सभी मौतों की जिम्मेदारी लेनी चाहिए, यहां तक कि दुर्योधन और दुशासन को भी इन मौतों की जिम्मेदारी लेनी चाहिए.’

चुनाव आयोग BJP के AI-टूल का कर रही इस्तेमाल- बनर्जी

उन्होंने कहा, ‘भाजपा के कहने पर AI के जरिए नाम हटाए जा रहे हैं. चुनाव आयोग ने भाजपा के AI-टूल का इस्तेमाल किया, जिससे SIR डेटा में नामों के मेल न खाने की समस्या सामने आई. वहीं, भाजपा कार्यकर्ता मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए गणना प्रपत्रों को बड़ी मात्रा में ले जाते हुए रंगे हाथों भी पकड़े गए. हमारी जानकारी के अनुसार, एक प्लान है कि झारखंड, बिहार और ओडिशा से लोग बंगाल में आकर वोट करेंगे.’

माइक्रो ऑब्जर्वर के इस्तेमाल पर बोलीं ममता बनर्जी

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा, ‘बिहार में अधिवास प्रमाण पत्र को अनुमति दी गई, तो बंगाल में क्यों नहीं. एसआईआर नियमों के मुताकि, सूक्ष्म पर्यवेक्षकों (माइक्रो ऑब्जर्वर) का इस्तेमाल प्रतिबंधित है, लेकिन इन्हें सिर्फ बंगाल में तैनात किया गया है. अंत में एक नाम सामने आया है, माइक्रो ऑब्जर्वर हरिदास शॉ, जो भाजपा का पार्टी कार्यकर्ता है.’

उन्होंने कहा, ‘कुछ नामों को काट दिया गया था, लेकिन जिन सभी नामों को दर्ज किया गया था, उन्हें अब बहाल कर दिया गया है. यह जानते हुए भी कि एसआईआर सुनवाई के लिए किन लोगों को बुलाया जा रहा था, डीएम की ओर से लाखों नाम दर्ज किए जा रहे थे और अब उन्हें ब्लॉक कर दिया गया है.’

(रिपोर्ट- पीटीआई के इनपुट के साथ)

यह भी पढ़ेंः हैदराबाद में ड्यूटी पर जा रहे ASI का मांझे से कटा गला, बुजुर्ग महिला भी लहूलुहान