पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर राजनीति काफी गर्म है. राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बंगाल में जारी एसआईआर प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठाते हुए तीखी टिप्पणी की है. उन्होंने कहा है कि हम उन सभी लोगों के साथ एकजुटता से खड़े है, जिनके नाम चुनाव आयोग ने एसआईआर के तहत वोटर लिस्ट से हटा दिए हैं.
चुनाव आयोग पर भड़कीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार (7 अप्रैल, 2026) को पश्चिम बंगाल के नदिया जिले के चकदाहा में एक चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि राज्य में एसआईआर के बाद वोटर लिस्ट से मतुआ और अल्पसंख्यक समुदायों के लोगों के नाम हटा दिए गए हैं. उन्होंने कहा, ‘तृणमूल कांग्रेस (TMC) उन सभी लोगों के साथ खड़ी रहेगी, जिनके नाम विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं. हम ट्रिब्यूनल्स में इसके लिए कानूनी लड़ाई लड़ते रहेंगे.’
मुख्यमंत्री ने चुनाव आयोग पर आरोप लगाते हुए कहा, ‘पश्चिम बंगाल में मतुआ, राजबंशी और अल्पसंख्यक समुदायों के लोगों को निशाना बनाकर विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद वोटर लिस्ट से उनके नाम हटाए जा रहे थे.’
सुप्रीम कोर्ट में दखल के बाद 32 लाख नाम किए गए बहाल
चुनाव आयोग के नए डेटा के मुताबिक, पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची में से एसआईआर प्रक्रिया के बाद करीब 91 लाख मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं. वहीं, ममता बनर्जी ने दावा किया है कि सुप्रीम कोर्ट में उनके हस्तक्षेप के बाद विचाराधीन करीब 60 लाख मामलों में से लगभग 32 लाख नाम बहाल कर दिए गए हैं. उन्होंने कहा कि सबसे ज्यादा वोट मुस्लिम और मतुआ समुदाय के लोगों को कटा है.
23 अप्रैल को बंगाल में होगा पहले चरण का चुनाव
294 विधानसभा सीटों वाले पश्चिम बंगाल में दो चरणों में चुनाव संपन्न कराया जाना निर्धारित किया गया है. पश्चिम बंगाल में पहले चरण का चुनाव 23 अप्रैल, 2026 को आयोजित किया जाएगा. इसके बाद दूसरे चरण का चुनाव 29 अप्रैल, 2026 को होगा. इसके बाद वोटों की गिनती और चुनाव के नतीजों के घोषणा 4 मई, 2026 को की जाएगी.
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