सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सोमवार (20 अप्रैल, 2026) को एक शख्स को जमकर फटकार लगाई और चेतावनी दी है कि सुप्रीम कोर्ट में एंट्री बंद कर देंगे. इस शख्स ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को 'राष्ट्र पुत्र' घोषित करने, उनके और उनकी आजाद हिंद फौज (INA) के सशस्त्र संघर्ष को आजादी का मुख्य कारण मानने की घोषणा करने की मांग की थी.

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मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच के सामने पिनाकपानी मोहंते की याचिका सुनवाई के लिए लगी. सीजेआई को उस वक्त गुस्सा आया जब उन्हें पता चला कि इस याचिकाकर्ता ने पहले भी दो बार ऐसी ही मिलती-जुलती याचिका दाखिल की थी और वे खारिज कर दी गई थीं.

चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने याचिकाकर्ता को फटकार लगाते हुए कहा, 'आपका मकसद सिर्फ प्रचार पाना लगता है. हम रजिस्ट्री को निर्देश दे रहे हैं कि भविष्य में आपकी कोई पीआईएल स्वीकार न करे.' जब सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि ऐसी ही याचिका पहले भी दाखिल की जा चुकी है तो याचिकाकर्ता ने जवाब दिया, 'इस बार अलग है.' 

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याचिकाकर्ता की इस दलील पर सीजेआई सूर्यकांत याचिका पर सुनवाई के लिए तैयार नहीं हुए और याचिकाकर्ता को चेतावनी दी कि उनकी एंट्री सुप्रीम कोर्ट में बंद कर दी जाएगी. सीजेआई ने बेहद गुस्से भरे लहजे में कहा, 'एंट्री बंद कर देंगे तुम्हारा सुप्रीम कोर्ट में अब. पहले भी हम ऐसी याचिका खारिज कर चुके हैं.'

याचिका में नेताजी सुभाष चंद्र बोस को राष्ट्र पुत्र घोषित किए जाने की मांग के अलावा यह भी अपील की गई थी कि उनके जन्म दिवस 23 जनवरी, 1897 और आईएनए के स्थापना दिवस 21 अक्टूबर, 1943 को नेशनल डे के रूप में मनाया जाए.

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याचिकाकर्ता ने कोर्ट से संबंधित अधिकारियों और विभाग को इस संबंध में निर्देश देने की मांग की थी. याचिका में यह भी अपील की गई कि संबंधित अधिकारियों को 1947 में देश को मिली आजादी की वास्तिवक रिपोर्ट जारी करने का निर्देश दिया जाए, जिसमें बताया जाए कि कैसे और किस वजह से अंग्रेजों ने भारत छोड़ा.