कर्नाटक के सीएम डीके शिवकुमार ने रविवार (2 अगस्त) को कावेरी नदी पर राज्य सरकार की तरफ से प्रस्तावित मेकेदातु बांध परियोजना को कर्नाटक और पड़ोसी तमिलनाडु के बीच चल रहे पानी बंटवारे के विवाद को लेकर स्थायी समाधान बताया है. 

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उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कहा कि मेकेदातु परियोजना ही स्थायी समाधान है. सुप्रीम कोर्ट पहले ही अपना फैसला सुना चुका है. केंद्र ने भी प्रतिक्रिया दी है. इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए, हमें बिना और समय बर्बाद किए आगे बढ़ना चाहिए. पिछले कुछ दिनों से यह मुद्दा गरमा गया है. 

डीके शिवकुमार ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का किया जिक्र

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सीएम शिवकुमार ने सुप्रीम कोर्ट की तरफ से नवंबर 2025 में मेकेदातु परियोजना पर कर्नाटक की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) के खिलाफ तमिलनाडु की आपत्ति को खारिज करने का जिक्र किया. इस साल मई में शीर्ष अदालत ने पिछले फैसले को चुनौती देने वाली तमिलनाडु की समीक्षा याचिका को खारिज कर दिया था. 

केंद्र ने जुलाई में संसद को सूचित किया था कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश में यह नहीं कहा गया है कि कावेरी नदी पर किसी भी नए निर्माण के लिए कर्नाटक को तमिलनाडु की सहमति की आवश्यकता है. शिवकुमार ने सभी पक्षों से आग्रह किया कि वे इन घटनाक्रमों को ध्यान में रखते हुए बिना और समय बर्बाद किए आगे बढ़ें. 

डीके शिवकुमार बोले- यह समय दोनों राज्यों को मेज पर चर्चा करने को लेकर है

शिवकुमार ने कहा कि यह मामला तमिलनाडु को अधिक पानी मिलने या कर्नाटक को कम पानी मिलने का नहीं है. हमें इस अवसर का उपयोग कर दोनों राज्यों को बातचीत के मेज पर लाने, चर्चा करने और इस मुद्दे को सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझाने के लिए करना चाहिए. हम इस प्रयास में सभी के सहयोग की उम्मीद करते हैं. पूरा विवाद इस पर है कि दोनों राज्यों के बीच नदी के पानी का बंटवारा कैसे किया जाए. खासकर कम बारिश वाले सालों में.