नई दिल्लीः केंद्र सरकार के 48 लाख कर्मचारियों-अधिकारियों के साथ 55 लाख पेंशनर के लिए अच्छी खबर. केंद्रीय कैबिनेट ने सातवें वेतन आय़ोग की सिफारिशों के मद्देनजर वित्त सचिव अशोक ल्वासा की अध्यक्षता में बनायी गयी कमेटी के सुझावो के आधार पर भत्तों में फेरबदल को मंजूरी दे दी. भत्तों की नयी व्यवस्था पहली जुलाई से लागू होगी.
फैसले के मुताबिक,
- 108 किस्म के भत्ते पहले की तरह जारी रहेंगे
- 34 भत्तों को मिला दिया गया है जबकि 43 भत्तों को खत्म कर दिया गया है
आवास भत्तों की नयी व्यवस्था का स्वरुप कुछ इस तरह होगा:
(सभी आंकड़े फीसदी में)
- मौजूदा व्यवस्था की तहत तीन वर्ग के शहरों के लिए 30, 20 और 10 फीसदी के हिसाब से आवास भत्ता मिलता है. अब पहली दो परिस्थितियों में दर भले ही कम हो, लेकिन भत्तों का आंकलन जिस मूल वेतन पर होगा, वो पहले ही बढ़ा दिया गया है, लिहाजा लोगों को पहले के मुकाबले ज्यादा आवास भत्ता मिलेगा.
- आवास भत्ता का फायदा उन सभी लोगों को मिलेगा जो सरकारी आवास में नहीं रहते हैं
- निचले कर्म के कर्मचारियों के लिए आवास भत्ता एक्स कैटगरी वाले शहरों में कम से कम 5400, वाई कैटगरी वाले शहरों में कम कम से कम 3600 रुपये और जेड कैटगरी वाले शहरों में कम से कम 1800 रुपये होगी.
- बच्चों की पढ़ाई के लिए मिलने वाला भत्ता प्रति बच्चा 1500 रुपये से बढञाकर 2250 रुपये कर दिया गया है. ये सुविधा ज्यादा से ज्यादा दो बच्चों के मिलेगी. हॉस्टल सब्सिडी 4500 रुपये प्रति महीने से बढ़ाकर 6750 रुपये कर दिया गया गया है.
- सियाचीमें तैनात जवान और जूनियर कमिशड ऑफिसर के लिए भत्ता 14 हजार रुपये से बढाकर 30 हजार रुपये और अधिकारियो के लिए 21 हजार रुपये से 42,500 रुपये कर दिया गया है.
- पेंशनर के लिए चिकित्सा भत्ता 500 रुपये प्रति महीने से बढ़ाकर 1000 रुपये कर दिया गया है.
- भत्तों में बढ़ोतरी होने की वजह से इस मद में सरकार का सालाना खर्च 30478.23 करोड़ रुपये होगा. चूंकि चालू कारोबारी साल में भत्तों की संशोधित दर पहली जुलाई से लागू हो रहे हैं, लिहाजा इस साल खर्च कम होगा.