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पीएम मोदी, पुतिन और जिनपिंग...BRICS की ताकतवर तस्वीर, दुनिया को संदेश

ब्रिक्स समिट 2026 की तस्वीरें सामने आई है. इसमें पीएम मोदी रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का हाथ पकड़े नजर आए.

दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से दुनिया को संदेश देने वाली तस्वीरें सामने आई है. पीएम मोदी चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का हाथ थामे नजर आए. इस दौरान कुछ बातें भी हुई और मुस्कुराते हुए ये नेता आगे बढ़ गए.

पीएम मोदी के पुतिन, शी जिनपिंग, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान की एक ही मंच पर मौजूदगी ने ब्रिक्स सम्मेलन को खास बना दिया है. यह सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है जब दुनिया रूस-यूक्रेन युद्ध और ईरान और अमेरिका युद्ध जैसी बड़ी चुनौतियों से गुजर रही है. ऐसे माहौल में BRICS का मंच भारत को अलग-अलग पावर सेंटर के साथ संवाद बनाए रखने का मौका दे रहा है.


पीएम मोदी, पुतिन और जिनपिंग...BRICS की ताकतवर तस्वीर, दुनिया को संदेश

ब्रिक्स समिट 2026 की तस्वीर में नरेंद्र मोदी के साथ व्लादिमीर पुतिन, शी जिनपिंग और मसूद पेजेशकियान की मौजूदगी को वैश्विक कूटनीति के नजरिए से महत्वपूर्ण माना जा रहा है. 


पीएम मोदी, पुतिन और जिनपिंग...BRICS की ताकतवर तस्वीर, दुनिया को संदेश

भारत की विदेश नीति

चीन और रूस दोनों BRICS को पश्चिमी नेतृत्व वाले वैश्विक ढांचे के बाहर सहयोग बढ़ाने के महत्वपूर्ण मंच के रूप में देखते हैं. दूसरी ओर भारत की स्थिति थोड़ी अलग है. नई दिल्ली रूस और ईरान के साथ अपने संबंध बनाए रखते हुए अमेरिका और यूरोप के साथ भी रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ा रहा है. यही संतुलन भारत की विदेश नीति को इस समय खास बनाता है.

भारत ने दिखाया कि बातचीत के रास्ते खुले हैं

नई दिल्ली में BRICS सम्मेलन की सबसे बड़ी तस्वीर यही है कि अलग-अलग राजनीतिक मत रखने वाले देश एक ही मंच पर बातचीत कर रहे हैं. भारत इस मंच के जरिए व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा, निवेश, तकनीक और वैश्विक विकास जैसे मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने की कोशिश कर रहा है.


पीएम मोदी, पुतिन और जिनपिंग...BRICS की ताकतवर तस्वीर, दुनिया को संदेश

प्रधानमंत्री मोदी और रूसी राष्ट्रपति पुतिन की बैठक में दोनों देशों ने व्यापार, रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष, महत्वपूर्ण खनिज और दूसरे क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा की. दोनों पक्षों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक ले जाने की दिशा में काम जारी रखने पर भी जोर दिया. शी जिनपिंग की भारत यात्रा भी काफी महत्वपूर्ण है. 2020 के सीमा विवाद के बाद दोनों देशों के रिश्तों में तनाव रहा है. ऐसे में जिनपिंग का भारत आना और मोदी के साथ संभावित बातचीत रिश्तों को संभालने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है.

ईरान को लेकर भी भारत का संतुलित रुख

मसूद पेजेशकियान की मौजूदगी पश्चिम एशिया के मौजूदा संकट के बीच खास महत्व रखती है. भारत ईरान के साथ अपने रिश्तों को ऊर्जा, व्यापार और चाबहार बंदरगाह जैसे रणनीतिक मुद्दों से जोड़कर देखता है. ईरान के साथ संबंध बनाए रखना भारत के लिए इसलिए भी जरूरी है क्योंकि चाबहार के जरिए भारत को अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंच का एक अहम रास्ता मिलता है. वहीं पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से ऊर्जा और समुद्री व्यापार की सुरक्षा भी भारत की बड़ी चिंता है. भारत की कोशिश है कि वह ईरान समेत क्षेत्र के सभी महत्वपूर्ण देशों के साथ बातचीत का रास्ता खुला रखे और किसी एक खेमे की राजनीति तक खुद को सीमित न करे.

BRICS से पाकिस्तान को सदस्यता की उम्मीद, लेकिन रास्ता आसान नहीं

BRICS को लेकर पाकिस्तान भी लंबे समय से सदस्यता की कोशिश कर रहा है. पाकिस्तान ने 2023 में समूह में शामिल होने के लिए आवेदन किया था. रिपोर्टों के मुताबिक चीन और रूस से उसे समर्थन हासिल करने की कोशिश रही है, लेकिन BRICS में नए सदस्य को शामिल करने के लिए आम सहमति जरूरी है. भारत की आपत्ति को पाकिस्तान की सदस्यता की राह में बड़ी अड़चन माना जाता है.

पाकिस्तान के लिए BRICS की सदस्यता आर्थिक और कूटनीतिक दोनों लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकती है. समूह का विस्तार होने के बाद इसका वैश्विक प्रभाव काफी बढ़ा है. हालांकि, यह कहना सही नहीं होगा कि केवल भारत ही पाकिस्तान की सदस्यता का अंतिम फैसला करता है, क्योंकि BRICS का विस्तार सारे सदस्यों के फैसलों पर आधारित है.

अमेरिका के लिए क्यों महत्वपूर्ण है BRICS?

ईरान को लेकर भी वॉशिंगटन की नीति काफी सख्त है. अमेरिका में रूस-ईरान प्रतिबंधों से जुड़ा प्रस्ताव भी चर्चा में है, जिसमें रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने की संभावनाएं शामिल हैं. भारत जैसे देशों पर इसके संभावित आर्थिक प्रभाव को लेकर भी चर्चा हुई है. ऐसे माहौल में भारत का BRICS में सक्रिय रहना यह दिखाता है कि नई दिल्ली अपनी विदेश नीति को केवल एक शक्ति समूह तक सीमित नहीं रखना चाहती. भारत अमेरिका के साथ रणनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाते हुए रूस, ईरान और चीन के साथ भी जरूरी संवाद बनाए रखना चाहता है.

BRICS भारत के लिए बना बड़ा कूटनीतिक मंच

2026 में भारत की अध्यक्षता में हो रहा BRICS सम्मेलन केवल नेताओं की बैठक नहीं है. यह भारत के लिए अपनी कूटनीतिक क्षमता और Global South में भूमिका को मजबूत करने का बड़ा अवसर है. भारत की अध्यक्षता का फोकस Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability पर है. सम्मेलन में व्यापार, निवेश, ऊर्जा सुरक्षा, तकनीक, सप्लाई चेन और विकास से जुड़े मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने की कोशिश हो रही है. BRICS में अब 11 सदस्य देश हैं और समूह वैश्विक आबादी के करीब आधे हिस्से तथा वैश्विक GDP के लगभग 40 फीसदी हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है.

यही वजह है कि भारत मंडपम में मोदी, पुतिन, जिनपिंग और पेजेशकियान की एक साथ मौजूदगी को केवल एक फोटो के तौर पर नहीं देखा जा रहा. यह तस्वीर उस बदलती वैश्विक व्यवस्था की झलक भी देती है, जिसमें भारत अलग-अलग देशों के साथ संबंध बनाए रखते हुए अपने राष्ट्रीय हितों और रणनीतिक स्वतंत्रता को प्राथमिकता दे रहा है.

About the author सौरव कुमार

4 सालों से डिजिटल मीडिया में काम कर रहे हैं. साल 2022 से एबीपी न्यूज़ से जुड़े हुए हैं. राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय डेस्क की भी जिम्मेदारी संभालते हैं. सेंट्रल यूनिर्वसिटी ऑफ साउथ बिहार से 2022 में पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातक की डिग्री हासिल की. राजनीति, चुनाव, सामाजिक विषयों और साहित्य में रुचि है. तथ्यों की गहराई और भाषा की संवेदनशीलता पर जोर देते हैं. राजनीति से जुड़ी खबरों पर लगातार लिख रहे हैं

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