ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के साझा घोषणा पत्र को लेकर पेंच फंसा हुआ है. ब्रिक्स के 11 सदस्य देशों के शेरपा साझा घोषणापत्र पर आम सहमति बनाने की जद्दोजहद में लगे हुए हैं, लेकिन भारत की अध्यक्षता में हो रहे ब्रिक्स सम्मेलन का साझा घोषणापत्र बड़ी चुनौती बना हुआ है. यूएई, ईरान और सऊदी अरब ब्रिक्स के नए फुल टाइम मेंबर हैं. यूएई और ईरान के बीच गहरे मतभेद हैं और साझा घोषणा पत्र में यही बाधा बन रहा है. ईरान ने अमेरिका और इजरायल के हमलों के जवाब में यूएई में अमेरिकी ठिकानों को कई बार निशाना बनाया है.

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ईरान और यूएई को आपसी सहमति पर राजी करने के लिए भारत, रूस, ब्राजील और मिस्र के अधिकारी कड़ी कोशिशें कर रहे हैं. ब्रिक्स आम सहमति के फ्रेमवर्क पर काम करता है इसलिए इस बात को लेकर संशय है कि क्या सम्मेलन में साझा घोषणापत्र पर आम सहमति बन पाएगी?

रूस ने रास्ता निकलने की उम्मीद जताई

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क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने दिल्ली में कहा था, 'ईरान और यूएई की पोजिशन में विरोध स्वाभाविक है. हमें उम्मीद है कि वो देश जो रूस के मित्र हैं वो इस मुश्किल से उबर पाएंगे. अगर जरूरत है तो ईरान और यूएई के संबंधों को सामान्य करने में रूस मदद करने को तैयार है. पेस्कोव ने कहा कि रूस को उम्मीद है कि घोषणापत्र पर जारी बातचीत का सकारात्मक नतीजा निकल पाएगा क्योंकि भारत के पास बहुत काबिल राजनयिक हैं. उन्होंने कहा कि ईरान और यूएई दोनों के हितों को संरक्षित करने वाले शब्दों को खोजा जा सकेगा, ताकि घोषणापत्र पर आम सहमति बनाई जा सके.

ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में फंस गया था पेंच

इसी साल मई में ब्रिक्स के विदेश मंत्रियों की बैठक में ईरान और यूएई के बीच पश्चिम एशिया के संकट पर तीखे मतभेद खुलकर सामने आए थे. इस वजह से साझा बयान जारी नहीं किया जा सका था. अंत में भारत ने अध्यक्ष के तौर पर बयान जारी किया था. इसके साथ ही एक आउटकम दस्तावेज भी जारी किया था जिसमें दो ऐसे पैराग्राफ शामिल किए गए थे जिनपर आम सहमति नहीं बन सकी थी.