दुनिया को साथ लाएगा भारत? सलमान खुर्शीद ने की BRICS की तारीफ, जानें क्या कहा
BRICS समिट 2026 के बीच कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने भारत की भूमिका पर बात की. उन्होंने आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन, डी डॉलराइजेशन और ग्लोबल नॉर्थ-साउथ सहयोग पर अपनी राय रखी.

दिल्ली में चल रहे BRICS Summit 2026 के बीच कांग्रेस नेता और पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने भारत की भूमिका को लेकर अपनी राय रखी. उन्होंने कहा कि BRICS केवल सदस्य देशों के आर्थिक हितों तक सीमित मंच नहीं है, बल्कि इसके जरिए दुनिया की बड़ी चुनौतियों पर भी मिलकर काम किया जा सकता है.
खुर्शीद ने कहा कि भारत को अपनी अध्यक्षता के दौरान ऐसी व्यवस्था बनाने की दिशा में काम करना चाहिए, जिसमें अलग-अलग देश साझा मुद्दों पर एक साथ आ सकें. उनके मुताबिक आतंकवाद और जलवायु परिवर्तन जैसे विषयों पर वैश्विक स्तर पर सहमति बनाने की जरूरत है.
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आतंकवाद और जलवायु परिवर्तन पर साथ आने की जरूरत
सलमान खुर्शीद ने कहा कि आतंकवाद को केवल किसी एक देश की समस्या मानकर नहीं देखा जाना चाहिए. उन्होंने जोर दिया कि दुनिया के सभी देशों को मिलकर आतंकवाद के खिलाफ काम करना होगा. इसी तरह जलवायु परिवर्तन को भी उन्होंने पूरी दुनिया से जुड़ा मुद्दा बताया. उनका कहना था कि BRICS के मंच से ऐसे विषयों पर देशों के बीच सहमति बनाने की कोशिश की जानी चाहिए, क्योंकि इनका असर किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है.
डी-डॉलराइजेशन पर क्या बोले खुर्शीद?
BRICS में डॉलर पर निर्भरता कम करने की चर्चा के सवाल पर खुर्शीद ने कहा कि अलग-अलग देश आपसी व्यापार में अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं में लेनदेन करने की कोशिश कर रहे हैं. हालांकि, उन्होंने कहा कि इसे पूरी तरह डी-डॉलराइजेशन तभी कहा जा सकता है, जब कोई नई साझा मुद्रा या ऐसी व्यवस्था सामने आए, जिस पर व्यापक सहमति हो. उन्होंने यह भी कहा कि अभी BRICS देशों के बीच किसी एक नई मुद्रा को लेकर आम सहमति नहीं है. खुर्शीद के मुताबिक भविष्य में डॉलर आधारित व्यापार के लिए भी कोई नई व्यवस्था विकसित हो सकती है और अमेरिका भी इन बदलावों पर ध्यान देगा.
BRICS को ग्लोबल नॉर्थ और ग्लोबल साउथ के बीच पुल बताया
खुर्शीद ने BRICS की बढ़ती भूमिका पर भी बात की. उन्होंने कहा कि संगठन से दुनिया की बड़ी आबादी जुड़ी हुई है और इसे नजरअंदाज करना संभव नहीं है. उन्होंने BRICS देशों को तेजी से उभरती अर्थव्यवस्थाएं बताते हुए कहा कि आने वाले समय में इनका वैश्विक अर्थव्यवस्था में महत्व और बढ़ेगा. कांग्रेस नेता के मुताबिक BRICS को ग्लोबल नॉर्थ और ग्लोबल साउथ के बीच एक पुल के तौर पर भी देखा जा सकता है. उनके अनुसार विकसित और विकासशील देशों के बीच संवाद बढ़ाने में यह मंच महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.
भारत की अध्यक्षता पर विपक्ष की उम्मीद
सलमान खुर्शीद ने कहा कि भारत के पास इस समय BRICS की अध्यक्षता है, इसलिए दुनिया की नजर भारत पर है. उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत इस मंच पर अपनी भूमिका को प्रभावी तरीके से निभाएगा और विभिन्न देशों के बीच सहमति बनाने की कोशिश करेगा. उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष के तौर पर उनकी इच्छा है कि सरकार BRICS से जुड़े फैसलों और तैयारियों में विपक्ष से भी सलाह-मशविरा करे. हालांकि उन्होंने माना कि सरकार की मौजूदा नीति ऐसी नहीं है, लेकिन उन्होंने कहा कि विपक्ष अपनी अपेक्षाएं सामने रखने का काम जरूर कर सकता है.
BRICS में आपसी मतभेद भी बड़ी चुनौती
खुर्शीद ने यह भी याद दिलाया कि BRICS में शामिल सभी देशों के बीच हर मुद्दे पर एक जैसी राय नहीं है. कुछ सदस्य देशों के आपस में मतभेद और विवाद भी हैं. उन्होंने ईरान और UAE का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसे मतभेदों के बावजूद BRICS के मंच पर बातचीत और सहयोग का रास्ता तलाशना जरूरी है.उनके मुताबिक अगर अलग-अलग देशों के बीच मौजूद मुश्किलों को कम करने की दिशा में काम किया जाए, तो इसका फायदा केवल BRICS देशों को नहीं बल्कि पूरी दुनिया को मिल सकता है.
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