BMC चुनाव में बीजेपी का दबदबा, क्या ठाकरे ब्रदर्स के राजनीतिक भविष्य पर पूर्णविराम? समझें एक्सपर्ट की राय
Expert View: बीएमसी चुनाव में ठाकरे ब्रदर्स को झटका लगा है, तो वहीं बीजेपी ने बीएमसी की सत्ता की चाबी हथिया ली है. इस चुनाव में राज और उद्धव के राजनीतिक करियर पर एक्सपर्ट ने अपनी बात रखी है.

महाराष्ट्र नगर निकाय चुनाव में बीजेपी ने बड़ी जीत हासिल की है. मुंबई की जनता ने फैसला सुनाते हुए बीजेपी की सत्ता बीएमसी में काबिज कर दी है. लोगों ने फडणवीस और शिंदे की जोड़ी पर भरोसा जाताया है. यानी देश की सबसे अमीर नगर पालिका की सत्ता की चाबी बीजेपी के हाथ में रहेगी. इस चुनाव में ठाकरे ब्रदर्स को बड़ा झटका लगा है.
राजनीतिक विश्लेषक प्रफुल सारडा से जब ABP News ने बीएमसी चुनाव के नतीजों को लेकर सवाल किया कि इन नतीजों के बाद ठाकरे ब्रदर्स यानी राज और उद्धव ठाकरे का राजनीतिक करियर खत्म हो गया है?
इस पर राजनीतिक विश्लेषक प्रफुल सारडा ने कहा, 'देखिए जिस तरह से मुंबई के लोगों ने मराठी मानुष और मुंबई में जो यहां के लोग नहीं है, जिनकी जन्म भूमि नहीं कर्मभूमि है या जो जहां वोटर रहा है, उसके केस में अलग सा पैटर्न रहा है, विधानसभा में 10 सीटों में फायदा हुआ था.'
उन्होंने कहा, 'जिस तरह से दोनो भाई साथ में आए, सभी एग्जिट पोल और ग्राउंड रिपोर्ट में आया था कि चालीस से पचास सीट आएंगी, ये आंकड़ा उसको पार कर चुका है. आज भी बाला साहेब के नाम पर ठाकरे बंधुओं को वोट मिल रहा है. कुछ विचारशील लोग पार्टी के साथ जुड़े हुए हैं. बीएमसी का केवल एक चुनाव है. दो भाईयों ने मुंबई के बाहर जाना उचित नहीं समझा. दोनों ने बीएमसी केंद्रित चुनाव बना रखा था. यह अच्छी बात है.
'ठाकरे ब्रदर्स को 20 से 25 सीटें उम्मीद से ज्यादा मिली हैं'
उन्होंने कहा कि ठाकरे ब्रदर्स को इस चुनाव में 20-25 ज्यादा सीट मिली हैं. ठाकरे ब्रांड को खत्म करने में अभी कुछ साल लगेंगे. क्योंकि ठाकरे ब्रांड सिर्फ उद्धव और राज ठाकरे से नहीं है. बाला साहेब और उनके कार्यों से जुड़ा है. उनकी विरासत से लोग जुड़े हुए हैं. एक दो चुनाव किसी भी पार्टी को खत्म नहीं कर सकते. कोई पॉलिटिक्ल पार्टी खत्म नहीं होती है. अब यह बीएमसी के जरिए कैसे लोगों तक पहुंचते हैं, उनके मुद्दों को उठाते हैं, यह देखना उचित रहेगा. क्योंकि उन्हें एक तिहाई नंबर मिला है. यह अच्छा नंबर है.
'एक सम्मानजनक नंबर ठाकरे ब्रदर्स को मिला है'
उन्होंने कहा कि इनपर जिन लोगों ने भरोसा करके वोट दिया है, क्या उस जनता के लिए यह काम कर पाएंगे, या आरोप प्रत्यारोप की राजनीति चलती रहेगी. ये देखना दिलचस्प होगा. यह अच्छा कमबैक है. इसका फायदा मनसा और शिवसेना (U) दोनों को हुआ है. एक सम्मानजनक नंबर ठाकरे ब्रदर्स के गठबंधन को मिला है. कांग्रेस से हटने पर उद्धव ठाकरे की पार्टी को फायदा हुआ है. उनसे मुस्लिम वोटर भी इस चुनाव में जुड़े. शिवसेना ने बीएमसी में पकड़ मजबूत की है. एक अच्छा विपक्ष बीएमसी में मिला है.
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Source: IOCL


























