भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने गुरुवार को कांग्रेस और देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू पर तीखा हमला बोला. पार्टी ने आरोप लगाया कि नेहरू ने हमेशा ब्रिटिश की तरह काम किया और जानबूझकर देश के हितों के साथ समझौता किया. बीजेपी राज्यसभा सांसद संबित पात्रा ने दावा किया कि नेहरू के फैसलों से देश की सुरक्षा और संप्रभुता प्रभावित हुई.

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नेहरू के कार्यालय में CIA और KGB की सक्रियतासंबित पात्रा ने बीजेपी मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि नेहरू के कार्यालय में सीआईए और केजीबी एजेंट सक्रिय थे. उन्होंने आरोप लगाया कि नेहरू ने विदेशी एजेंसियों को गुप्त दस्तावेज सौंपकर भारत की सुरक्षा से समझौता किया. पात्रा ने कहा, ‘समझौता चाचा’ के सचिवालय में इतनी मजबूत विदेशी मौजूदगी थी कि उनके विशेष सहायक एमओ माथाई को अमेरिकी एजेंट कहा जाता था. 1960 के दशक में केजीबी के एजेंट भी उनके कार्यालय में मौजूद थे. किसी भी दस्तावेज की जरूरत अमेरिकी या रूसी एजेंसियों को तुरंत उपलब्ध हो जाती थी.'

तिब्बत और अक्साई चिन पर नेहरू की नीतिपात्रा ने दावा किया कि पंचशील समझौते के तहत तिब्बत को चीन को सौंपा गया. उन्होंने कहा कि नेहरू को आईबी ने सूचना दी थी कि चीन अक्साई चिन में सड़क बना रहा है, लेकिन नेहरू ने इसे पूरी तरह नजरअंदाज किया. उनका कहना था कि नेहरू चीन की मदद करने की कोशिश कर रहे थे.

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1962 के चीन युद्ध और सेना की नियुक्तियांबीजेपी नेता ने कहा कि 1962 में भारत को चीन से हार के लिए नेहरू जिम्मेदार थे. उन्होंने अपनी रिश्तेदार, जनरल बीएम कौल, को चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ नियुक्त किया और फॉरवर्ड पॉलिसी अपनाई, जिससे देश को नुकसान हुआ.

बड़ुबारी और पाकिस्तान को सौंपे गए क्षेत्रपात्रा ने आरोप लगाया कि नेहरू ने पश्चिम बंगाल सरकार को सूचित किए बिना बड़ुबारी क्षेत्र पाकिस्तान को दे दिया. उन्होंने कहा, 'सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद नेहरू ने नौवें संविधान संशोधन के जरिए बड़ुबारी पाकिस्तान को सौंप दिया. उस समय किए गए समझौतों के कारण आज भारत को नुकसान भुगतना पड़ रहा है.'