राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने शनिवार सुबह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की. मुलाकात के बाद चड्ढा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर तस्वीर साझा करते हुए इसे अपने लिए यादगार सुबह बताया. उन्होंने प्रधानमंत्री के साथ हुई बातचीत को विस्तृत और ज्ञानवर्धक बताया.

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राघव चड्ढा ने पीएम मोदी का जताया आभार

राघव चड्ढा ने अपनी पोस्ट में लिखा, “यह एक ऐसी सुबह है, जिसे मैं हमेशा संजोकर रखूंगा. माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी से मुलाकात का अवसर मिला. उनके साथ विस्तृत और समृद्ध बातचीत हुई. उन्होंने अपने बहुमूल्य समय के लिए जिस उदारता का परिचय दिया और उनके विचारों तथा मार्गदर्शन से लाभ उठाने का अवसर मिला, उसके लिए मैं उनका हृदय से आभारी हूं.”

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चड्ढा ने प्रधानमंत्री के साथ हुई बातचीत को अपने लिए सीख और अनुभव से भरपूर बताया. उन्होंने पीएम मोदी के समय देने और उनके विचारों व मार्गदर्शन से लाभ लेने का अवसर मिलने पर आभार व्यक्त किया.

विभिन्न दलों के करीब 45 सांसदों से मिले प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 अगस्त को विभिन्न राजनीतिक दलों के करीब 45 सांसदों के साथ नाश्ते पर मुलाकात की. इस दौरान शिवसेना के सात, एनसीपीआई के 20, अजित पवार गुट की एनसीपी के दो सांसदों सहित उपेंद्र कुशवाहा और अन्य सांसद मौजूद रहे. बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने सांसदों को संसदीय क्षेत्र के विकास, जनता से जुड़ाव और स्वास्थ्य को लेकर कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए.

सांसदों को विकास कार्यों में उपलब्ध शक्ति के सही इस्तेमाल की सलाह

प्रधानमंत्री ने नाश्ते पर मौजूद सांसदों से कहा कि वे अपने संसदीय क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति देने के लिए उपलब्ध संसाधनों और अधिकारों का प्रभावी इस्तेमाल करें. उन्होंने बताया कि क्षेत्र से जुड़ी किसी भी विकास योजना के लिए सांसद सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) से संपर्क कर सकते हैं. प्रधानमंत्री ने सांसदों से व्यक्तिगत रूप से बातचीत की और उनका हाल-चाल पूछा. इस दौरान धाराशिव के सांसद ओमराजे निंबालकर से प्रधानमंत्री ने उनके योगाभ्यास के बारे में भी जानकारी ली.

नाश्ते के दौरान सांसदों से व्यक्तिगत तौर पर मिले PM

बैठक के दौरान प्रधानमंत्री सभी सांसदों के पास गए और उनसे व्यक्तिगत बातचीत की. इस दौरान उन्होंने एक अच्छे मेजबान की भूमिका भी निभाई. प्रधानमंत्री ने सांसदों को यह संदेश भी दिया कि सदन में किसी दल के सांसदों की संख्या के आधार पर प्राथमिकता या भेदभाव नहीं किया जाता. उन्होंने कहा कि सभी सांसदों के साथ समान व्यवहार होना चाहिए और जनप्रतिनिधियों को अपने क्षेत्रों की जनता के प्रति जिम्मेदारी को प्राथमिकता देनी चाहिए.