Gen-Z युवाओं तक पहुंच बनाने के लिए बीजेपी ने रणनीति बदली है. अब सोशल मीडिया मैसेजिंग के साथ पार्टी युवाओं से सीधा और दोतरफा संवाद करेगी. सांसद, विधायक और सीनियर नेता कॉलेज, यूनिवर्सिटी और कोचिंग संस्थानों में जाकर छात्रों से उनके मुद्दों पर बात करेंगे. खास बात ये कि संवाद राजनीतिक मंच से दूर रखा जाएगा. भाजपा ने यह कदम ऐसे समय में उठाया है, जब देशभर में कई जगहों पर Gen-Z के प्रदर्शन चल रहे हैं.
नीट पेपर लीक के बाद छात्रों के आंदोलन और युवाओं की बढ़ती राजनीतिक सक्रियता के बीच बीजेपी ने अपना Gen-Z कनेक्ट प्लान तैयार किया है. बीजेपी अब 18 नहीं, 14 साल की उम्र से युवाओं से संवाद शुरू करेगी. 14 से 22 साल के युवाओं को अभियान के दायरे में लाया जाएगा.पार्टी का मानना है कि सोशल मीडिया के दौर में ये उम्र वर्ग राय बनाने और परिवार को प्रभावित करने में अहम भूमिका निभाता है. इसलिए इंस्टाग्राम, स्नैपचैट और रेडिट जैसे प्लेटफॉर्म पर विजुअल कंटेंट और इंटरैक्टिव संवाद पर जोर होगा.
नितिन नवीन ने विशाखापत्तनम में युवाओं से की बातचीत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्टिकल वीडियो और सेल्फी फॉर्मेट को भी इसी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है. कल (18 अगस्त) बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी इसी अभियान के तहत विशाखापत्तनम में Gen-z युवाओं के साथ संवाद किया और उनको पार्टी और सरकार द्वारा युवाओं को लेकर चलाए जा रहे कामों को लेकर जानकारी दी.
क्या होगी बीजेपी की रणनीति?
बीजेपी का Gen-Z कनेक्ट सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रहेगा. सांसद, विधायक, केंद्रीय मंत्री और संगठन के वरिष्ठ नेता कॉलेज, यूनिवर्सिटी, कोचिंग सेंटर और स्पोर्ट्स क्लब में युवाओं से सीधे संवाद करेंगे. इस बातचीत को अनौपचारिक रखने पर जोर दिया जाएगा. बातचीत परीक्षा, पाठ्यक्रम, प्रतियोगी परीक्षा, रोजगार और करियर जैसे मुद्दों से शुरू होगी. छात्र राजनीतिक सवाल पूछते हैं तो उनका जवाब भी संवाद के आधार पर देने की कोशिश होगी.
कैंपेन की कोई लिमिट नहीं
ये अभियान किसी तय समय तक नहीं, बल्कि पूरे साल लगातार चलेगा. प्रदेश संगठन इसकी निगरानी करेगा और रिपोर्ट केंद्र को भेजी जाएगी. आईआईटी, आईआईएम और बड़े शोध संस्थानों में स्थानीय सांसदों के साथ केंद्रीय स्तर के नेता संवाद करेंगे. वहीं हर विधानसभा क्षेत्र में युवा टीमों के गठन पर भी जोर है.
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कोचिंग संस्थानों पर बीजेपी की निगाहें
बीजेपी की खास नजर कोचिंग संस्थानों पर है. रणनीतिकारों का मानना है कि एक शिक्षक क्लासरूम और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए हजारों-लाखों युवाओं तक पहुंच सकता है.कोटा,पटना , प्रयागराज , बैंगलोर, विशाखापत्तनम और तिरुअनंतपुरम जैसे स्थानों पर इसको लेकर योजना बनाकर काम किया जाएगा.
साथ ही संगठन और मंत्रिमंडल में युवा चेहरों को आगे लाकर भविष्य के नेतृत्व की तैयारी भी बीजेपी की रणनीति का हिस्सा है. यानी बीजेपी का फोकस अब सिर्फ युवाओं तक अपना संदेश पहुंचाने पर नहीं, बल्कि उन्हें सुनने और लगातार संवाद बनाए रखने पर है.
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