नई दिल्ली: राजस्थान के अलवर में गोरक्षकों की पिटाई से हुई रकबर उर्फ अकबर की मौत के बाद राहुल गांधी के द्वारा इसे ‘मोदी का क्रूर न्यू इंडिया’ बताने पर बीजेपी ने कांग्रेस अध्यक्ष पर बड़ा हमला किया है. रेलवे मंत्री पीयूष गोयल ने जहां इसे लेकर राहुल गांधी को नफरत का सौदागर बताया है वहीं स्मृति ईरानी ने इसे गिद्ध राजनीति करार दिया है.

पीयूष गोयल ने ट्वीट किया, अब अपराध होता है तो हर्ष के लिए बीच में मत कूदिए. बहुत हो गया. आप नफरत के सौदागर हैं. चुनावी फायदे के लिए आप समाज को बांटने की हर संभव कोशिश करते हैं. घड़ियाली आंसू बहाते हैं.

इसके साथ ही स्मृति ईरानी ने भी राहुल गांधी पर जमकर निशाना साधा है और उनके बयान को गिद्ध राजनीति करार दिया है. उन्होंने कहा, राहुल चुनावी फायदा लेने का एक मौका नहीं छोड़ते. राहुल की राजनीति गिद्ध राजनीति है.

आपको बता दें कि अलवर लिंचिंग पर हमला करते हुए राहुल गांधी ने मोदी पर निशाना साधा था. राहुल ने ट्वीट में लिखा कि जब मौका-ए-वारदात से अस्पताल सिर्फ 6 किमी. की दूरी पर ही था तो पुलिस को रकबर को वहां ले जाने में 3 घंटे क्यों लगे.

राहुल ने ट्वीट कर कहा, ''अलवर में पुलिसकर्मियों को घायल रकबर खान (अकबर खान) को छह किलोमीटर दूर अस्पताल ले जाने में तीन घंटे लग गए, क्यों? उन्होंने रास्ते में चाय भी पी. ये मोदी का क्रूर न्यू इंडिया है जहां नफरत ने मानवता की जगह ले ली है और लोग कुचले जा रहे हैं और मरने के लिए छोड़ दिये जा रहे हैं.''

आपको बता दें कि 20 जुलाई की रात को अकबर खान अन्य व्यक्ति के साथ पशुओं को ले जा रहा था, तभी अलवर में लालावंडी गांव के समीप ग्रामीणों के एक समूह ने उसे रोक लिया और गो तस्करी का आरोप लगाते हुए उसकी बेरहमी से कथित तौर पर पिटाई कर दी. जिसमें उसकी मौत हो गई.

अलवर लिंचिंग: अकबर को 4KM दूर अस्पताल ले जाने में पुलिस ने लगाए 3 घंटे कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि पुलिस को जब घटना की सूचना दी गई तो करीब एक बजे रात में घटनास्थल पर पहुंची. जिसके बाद वह पीड़ित अकबर खान को अस्पताल ले जाने के बजाय थाने ले गई. इस दौरान पुलिस ने रास्ते में चाय भी पी. पुलिस जब अकबर खान को ले जा रही थी तब वह जिंदा था. दावा किया जा रहा है कि पुलिस सुबह करीब चार बजे अकबर खान को अस्पताल लेकर पहुंची.

रामगढ़ जिला अस्पताल के डॉक्टर हसन ने कहा कि पुलिस जब सुबह पीड़ित को लेकर पहुंची तो वह मर चुका था. जिसके बाद उसे पोस्टमॉर्टम के लिए अलवर भेज दिया गया. चश्मदीदों का आरोप है कि पुलिस ने भी अकबर खान की पिटाई की थी. अगर पुलिस चाहती तो अकबर खान की जान बच सकती थी.