बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में रिकॉर्ड 65 फीसदी मतदान हुआ है. दूसरे चरण के लिए मंगलवार (11 नवंबर) को मतदान होगा और वोटों की गिनती 14 नवंबर को होगी. ऐसे में ये कयास लगाए जा रहे हैं कि पहले चरण की बंपर वोटिंग से क्या इस बार बिहार में बाजी पलट जाएगी.

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इसी को लेकर वरिष्ठ पत्रकार सतीश के. सिंह ने बताया कि इस चुनाव का एकमात्र फैक्टर एन है एम नहीं. नीतीश फैक्टर है. उन्होंने बताया कि बीजेपी ने नीतीश कुमार को लेकर भ्रम बनाकर रखा था. वहीं दूसरी ओर महागठबंधन भी नीतीश कुमार पर ज्यादा हमलावर नहीं देखा. 

वरिष्ठ पत्रकार ने बताया N फैक्टर N फैक्टर को लेकर उन्होंने कहा कि महिलाएं अक्सर नीतीश कुमार को वोट करती हैं. ऊपर से सरकार ने नई योजना के तहत महिलाओं के खाते में 10 हजार रुपये भी दिए हैं. ये सब चीजें नीतीश कुमार के पक्ष में दिख रही हैं और कहीं न कहीं बीजेपी को इस बार भी उन्हीं को सीएम बनाना पड़ेगा. दूसरे राउंड तक भी बिहार में नीतीश ही फैक्टर हैं पूरे चुनाव का. 

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'नीतीश के लिए महागठबंधन के दरवाजे अभी भी खुले'वरिष्ठ पत्रकार ने बताया कि अब बिहार चुनाव में लड़ाई दूसरे और तीसरे नंबर को लेकर है. अब ये देखना है कि बीजेपी दूसरे नंबर पर रहेगी या राजद दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरेगी. दूसरे चरण के चुनाव में राजद को फायदा मिल सकता है और बीजेपी को नुकसान हो सकता है. कुल मिलाकर नीतीश कुमार ही फैक्टर हैं दोनों साइड से. उन्होंने आगे बताया कि नीतीश कुमार के लिए महागठबंधन के दरवाजे अभी भी खुले हुए हैं. ऐसी खबरें भी हैं कि कई जगह प्रथम चरण के चुनाव में राजद और जदयू कार्यकर्ताओं ने आपसी समन्वय बनाकर वोटिंग की है. 

'बीजेपी इस बार तीसरे नंबर पर जा सकती है'उन्होंने कहा कि बीजेपी इस बार तीसरे नंबर पर जा सकती है, क्योंकि पहले चरण के चुनाव में कई शहरों की सीटों पर बीजेपी को काफी मशक्कत करनी पड़ी है. ऐसी भी रिपोर्ट हैं कि वो शहरों की कुछ सीटें भी हार सकते हैं. इस बार बिहार चुनाव में बीजेपी को काफी संघर्ष करना पड़ रहा है. ऐसा लगता है कि नीतीश कुमार का नाम न घोषित  होने के कारण बीजेपी को इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है. 

जन सुराज काटेगी वोटप्रशांत किशोर को लेकर उन्होंने कहा कि जन सुराज पार्टी को जो भी वोट मिले हैं. वो दो ही पार्टियों से कट कर मिल रहे हैं. या तो वो महागठबंधन को डेंट करेंगे या फिर बीजेपी का वोट काटेंगे. बिहार में पिछड़ी जातियों की संख्या लगभग 85 फीसदी है और बीजेपी 80 प्रतिशत के अंदर ही चुनाव लड़ती है तो ऐसे में इस बार उन्हें नुकसान होने की बड़ी संभावना है.

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