पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा दे चुके हैं, लेकिन उनकी चर्चा अभी भी बनी हुई है. कॉकरोच जनता पार्टी के समर्थकों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर कई दिनों तक प्रदर्शन किया और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद ही प्रदर्शन खत्म किया. अब इस मामले को लेकर अहम जानकारी सामने आई है. दावा किया जा रहा है कि केंद्र तरफ से सीजेपी को धर्मेंद्र प्रधान का मंत्रालय बदलने का विकल्प दिया गया था. 

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दरअसल कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि सरकार ने सीजेपी के डेलिगेशन को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से पहले उनका मंत्रालय बदलने का विकल्प दिया था, लेकिन सीजेपी इसके लिए तैयार नहीं हुई. वह धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर ही अड़ी रही. सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास बार-बार इस बात को कहते हुए नजर आए कि उनके समर्थक धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा ही चाहते हैं और इससे कम में नहीं मानेंगे.  

सीजेपी ने सरकार को दी थी चेतावनी

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सीजेपी ने हाल ही में सरकार को चेतावनी दी है कि अगर वह प्रदर्शनकारियों और आयोजकों के खिलाफ कोई नई एफआईआर दर्ज नहीं करने और आपराधिक मामलों को वापस लेने की गारंटी वाला लिखित आश्वासन मंगलवार तक नहीं देती है, तो फिर से प्रदर्शन शुरू करेगी. आशुतोष रांका ने कहा कि जंतर-मंतर पर 36 दिन तक चले प्रदर्शन को 25 जुलाई को समाप्त करने से पहले सरकार के साथ हुई तीसरे दौर की वार्ता में इस मुद्दे पर चर्चा हुई थी.

देर रात सीजेपी के पास पहुंचा सरकारी नोटिफिकेशन

सौरव दास ने देर रात एक्स पर वीडियो शेयर कर जानकारी दी कि उनके पास सरकार की तरफ से एक नोटिफिकेशन आया है, जिसमें प्रदर्शनकारियों के खिलाफ एक्शन न लेने की बात कही गई है. अहम बात यह है कि सीजेपी के प्रवक्ता ने हाल ही में सीनियर लॉयर कपिल सिब्बल से मुलाकात की. सिब्बल ने सीजेपी के फंड में एक करोड़ रुपए का अनुदान दिया है. उनका कहना था कि इसकी मदद से कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी.

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