बांग्लादेश काफी समय से हिंसा की आग में जल रहा है. हाल ही में छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद ढाका समेत कई इलाकों में हिंसा देखने को मिली. इस दौरान कई मीडिया संस्थानों, सांस्कृतिक केंद्रों और राजनीतिक कार्यालयों पर ताबड़तोड़ हमले किए गए हैं. आखिर क्यों बांग्लादेश में हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है. इस पर तसलीमा नसरीन ने अपनी राय रखी है.
तसलीमा ने बताई अपने हिंसा के पीछे की सच्चाई
अपने मुल्क में बने ऐसे हालात की सच्चाई बांग्लादेश की निर्वासित लेखिका तसलीमा नसरीन ने दुनिया के सामने रखी है. उन्होंने X पर एक पोस्ट में लिखा, 'देश लंबे समय से असंतोष की आग में जल रहा है. यह आवामी लीग और BNP के बीच झगड़े की वजह से नहीं है, न ही हसीना और यूनुस के बीच झगड़े की वजह से है, न ही उदिची और बदमाशों के बीच झगड़े की वजह से, और न ही हिंदू और मुसलमानों के बीच झगड़े की वजह से है. यह असल में कुछ और ही है.'
धर्मनिरपेक्षता और धार्मिक कट्टरता के बीच झगड़ा: तसलीमा
तसलीमा नसरीन आगे लिखती हैं, 'झगड़े की असली वजह कुछ और है. असली झगड़ा दो विचारधाराओं के बीच है. यह झगड़ा धर्मनिरपेक्षता और धार्मिक कट्टरता के बीच है. यह तर्कवाद और कट्टरपंथ के बीच का संघर्ष है. सच्चाई और झूठ के बीच का संघर्ष है. रोशनी और अंधेरे के बीच संघर्ष है. प्रगतिवाद और प्रतिक्रियावाद के बीच संघर्ष है.'
उन्होंने कहा, 'यह बुद्धिमत्ता और अज्ञानता के बीच संघर्ष है. सभ्यता और बर्बरता के बीच संघर्ष है. इंसानियत और क्रूरता के बीच संघर्ष है. आजाद सोच और अंधविश्वास के बीच संघर्ष है. यह दो तरह के लोगों के बीच झगड़ा है. वे जो आगे बढ़ना चाहते हैं और वे जो पीछे जाना चाहते हैं.'
शाम को ढाका में हुआ बम धमाका
एक तरफ लेखिका अपने मुल्क को अंधेरे में जाते देख रही हैं तो इधर हालात जस के तस बने हुए हैं. इसका सबूत बुधवार को राजधानी ढाका में एक बम ब्लास्ट की खबर के बाद देखने को मिला. इस धमाके में कई लोग घायल हुए हैं और एक शख्स की मौत हुई है. इलाके में घटना के बाद दहशत मच गई. धमाका राजधानी के मोगाबाजार में हुआ है. बम फेंकने के बाद उपद्रवी फरार हो गए.
पिछले कुछ वक्त से बांग्लादेश के हालात संवेदनशील
बांग्लादेश के हालात पिछले कुछ महीनों से काफी संवेदनशील बने हुए हैं. हाल ही में युवा नेता उस्मान हादी की मौत फिर हिंदू श्रमिक की मॉब लिंचिंग से माहौल काफी संजीदा हो गए हैं. हादी को 12 दिसंबर को ढाका के बिजोयनगर इलाके में एक चुनावी अभियान के दौरान नकाबपोश बंदूकधारियों ने गोली मार दी थी, जिसकी 18 दिसंबर को सिंगापुर में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई थी. वहीं, 18 दिसंबर की रात हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की हत्या कर दी गई थी.