केरल हाईकोर्ट ने एक अभिनेत्री पर हमले के 2017 के मामले की पीड़िता की उस याचिका पर शुक्रवार (12 जून, 2026) को राज्य सरकार से जवाब मांगा जिसमें अपराध से जुड़े दृश्य वाले मेमोरी कार्ड तक कथित अवैध पहुंच की जांच विशेष जांच दल (SIT) से कराने का अनुरोध किया गया है.

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जस्टिस सी. एस. डायस ने याचिका स्वीकार करते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी किया और उसे एक महीने के भीतर अपना जवाबी हलफनामा दाखिल करने का समय दिया. जस्टिस डायस ने एर्नाकुलम की जिला एवं सत्र अदालत को भी यह निर्देश दिया कि वह अपराध से जुड़े दृश्यों वाले मेमोरी कार्ड और पेन ड्राइव तथा पहले की गई जांच की रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में केरल उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल को भेजे.

हाईकोर्ट ने कहा कि सीलबंद लिफाफे को अगले आदेश तक रजिस्ट्रार जनरल की सुरक्षित अभिरक्षा में रखा जाए. कोर्ट ने यह निर्देश देते हुए कहा कि वरिष्ठ अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर के माध्यम से पेश हुई याचिकाकर्ता अंतरिम आदेश के लिए प्रथम दृष्टया मामला बनाने में सफल रही है.

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इस सप्ताह की शुरुआत में हाईकोर्ट के दो अलग-अलग न्यायाधीशों ने इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था. पीड़िता ने मेमोरी कार्ड और पेन ड्राइव की सामग्री के कथित तौर पर लीक होने की जांच उच्च न्यायालय की निगरानी में विशेष जांच दल से नए सिरे से कराने का अनुरोध किया है.

पीड़िता ने 2022 में केरल हाईकोर्ट का रुख करते हुए आरोप लगाया था कि हमले के दृश्य वाले मेमोरी कार्ड तक अवैध रूप से पहुंच प्राप्त की गई थी. इसके बाद 2023 में उच्च न्यायालय ने एर्नाकुलम की प्रधान जिला और सत्र अदालत को इस आरोप की जांच करने का निर्देश दिया था.

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पीड़िता ने आरोप लगाया था कि मुकदमे की सुनवाई शुरू होने से पहले जब मेमोरी कार्ड एर्नाकुलम की मजिस्ट्रेट अदालत और सत्र अदालत की अभिरक्षा में था, तब उस तक बिना अनुमति पहुंच बनाई गई.

एर्नाकुलम की प्रधान जिला एवं सत्र अदालत ने इस मामले में अभिनेता दिलीप को पिछले साल बरी कर दिया था. हालांकि, अदालत ने छह लोगों को दोषी ठहराया था जो अपहरण और यौन हमले में सीधे तौर पर शामिल पाए गए थे. यह मामला त्रिशूर से कोच्चि जा रही अभिनेत्री के 17 फरवरी, 2017 को अपहरण और चलती गाड़ी में उसके यौन उत्पीड़न से जुड़ा है.

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