5 राज्यों के विधानसभा चुनाव के बाद आए एग्जिट पोल में बीजेपी का प्रदर्शन मिला-जुला नजर आ रहा है. कुछ राज्यों में पार्टी काफी मजबूत दिख रही है तो कुछ जगहों पर अभी भी उसे मेहनत की जरूरत साफ दिखाई दे रही है. असम में बीजेपी के लिए सबसे अच्छी खबर है. एग्जिट पोल के अनुसार यहां पार्टी बहुत मजबूत स्थिति में है और लगातार तीसरी बार सरकार बनाती दिख रही है. पोल ऑफ पोल्स के मुताबिक बीजेपी को 87 से 99 सीटें मिल सकती हैं. इससे यह साफ संकेत मिलता है कि मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पकड़ राज्य में मजबूत बनी हुई है. चुनाव के दौरान विपक्ष ने उन पर कई आरोप लगाए, लेकिन एग्जिट पोल के रुझान बताते हैं कि इनका ज्यादा असर नहीं पड़ा और वोटर्स का भरोसा बीजेपी के साथ बना रहा.

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पश्चिम बंगाल में तस्वीर थोड़ी अलग है. यहां कई एग्जिट पोल बीजेपी को बढ़त देते दिख रहे हैं, लेकिन मुकाबला पूरी तरह एकतरफा नहीं है. पोल ऑफ पोल्स के अनुसार बीजेपी को 143 से 165 सीटें मिल सकती हैं, जबकि टीएमसी भी 122 से 141 सीटों के बीच रह सकती है. इसका मतलब है कि यहां मुकाबला काफी कड़ा है और आखिरी नतीजे आने तक स्थिति पूरी तरह साफ नहीं मानी जा सकती.

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केरल में बीजेपी की स्थिति कमजोर

केरल में बीजेपी की स्थिति अभी भी कमजोर बनी हुई है. ज्यादातर एग्जिट पोल में पार्टी को कोई खास बढ़त मिलती नहीं दिख रही है और कुछ सर्वे में तो उसका खाता खुलना भी मुश्किल बताया गया है. इससे यह साफ होता है कि केरल में बीजेपी अभी भी अपनी जगह मजबूत नहीं बना पाई है. तमिलनाडु में भी हाल कुछ ऐसा ही है. यहां बीजेपी को अलग से बड़ी ताकत के रूप में नहीं देखा जा रहा है. ज्यादातर एग्जिट पोल में उसे अन्य श्रेणी में रखा गया है, जिससे पता चलता है कि राज्य की राजनीति में उसकी भूमिका अभी सीमित है.

पुडुचेरी से बीजेपी के लिए राहत की खबर

पुडुचेरी से बीजेपी के लिए राहत की खबर है. यहां एग्जिट पोल के अनुसार बीजेपी के नेतृत्व वाला गठबंधन सरकार बनाता दिख रहा है और करीब 17 सीटें मिल सकती हैं. इससे पार्टी को दक्षिण में कुछ हद तक संतोष जरूर मिल सकता है. अगर सभी राज्यों को एक साथ देखें तो यह साफ दिखता है कि बीजेपी उत्तर और पूर्वोत्तर भारत में मजबूत स्थिति में है और वहां उसकी पकड़ और मजबूत हो रही है. पश्चिम बंगाल में भी पार्टी कड़ी टक्कर देती दिख रही है, लेकिन दक्षिण भारत के बड़े राज्यों जैसे केरल और तमिलनाडु में अभी भी बीजेपी के सामने बड़ी चुनौती बनी हुई है.

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