असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पर कथित तौर पर हेट स्पीच के कई बार आरोप लग चुके हैं, लेकिन अब मामला गंभीर होता नजर आ रहा है. असम सीएम के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है. सामाजिक कार्यकर्ता हर्ष मंदार ने दिल्ली की साकेत कोर्ट में अर्जी दाखिल कर सीएम सरमा के खिलाफ कथित हेट स्पीच को लेकर FIR दर्ज करने की मांग की है.
साकेत कोर्ट ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. कोर्ट के एडिशनल सेशन जज ने हिमंत को नोटिस जारी करते हुए मामले की अगली सुनवाई 15 जुलाई तय की है. दरअसल हर्ष मदार ने पहले मजिस्ट्रेट कोर्ट में शिकायत दाखिल कर कहा था कि असम के डिब्रूगढ़ जिले के डिगबोई में 27 जनवरी को दिए गए एक भाषण में हिमंत ने मुस्लिम वोटरों को लेकर विवादित बयान दिए थे.
क्या है पूरा मामला
आरोप है कि हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा था कि चार से पांच लाख मियां वोटरों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाएंगे. साथ ही लोगों से मुस्लिमों को परेशान करने की बात भी कही गई थी, जिससे वे असम छोड़ दें. याचिका में दावा किया गया कि मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि वे असम में वोट न डाल सकें. याचिकाकर्ता ने इन बयानों को धार्मिक और सामुदायिक वैमनस्य फैलाने वाला बताते हुए FIR दर्ज करने की मांग की.
याचिकाकर्ता भारतीय न्याय संहिता की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज करने की मांग की, जिनमें अलग-अलग समुदायों के बीच दुश्मनी फैलाना, धार्मिक भावनाएं भड़काना और राष्ट्रीय एकता को नुकसान पहुंचाने जैसे आरोप शामिल हैं. हालांकि इससे पहले ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट भानु प्रताप सिंह ने याचिकाकर्ता की याचिका खारिज कर दी थी.
अदालत ने शिकायत को लेकर क्या कहा
कोर्ट ने कहा था कि कथित बयान दिल्ली की अदालत के अधिकार क्षेत्र में नहीं दिए गए थे और ऐसा कोई ठोस सबूत भी पेश नहीं किया गया जिससे यह साबित हो कि दिल्ली में इन बयानों से तनाव या हिंसा की स्थिति बनी. इसके बाद याचिकाकर्ता ने सेशन कोर्ट का रुख किया. उनके वकील ने दलील दी कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत किसी भी संज्ञेय अपराध की जानकारी देश के किसी भी पुलिस स्टेशन में दी जा सकती है.
इसे जीरो FIR की व्यवस्था बताया गया जिसमें अपराध कहीं भी हुआ हो शिकायत दर्ज की जा सकती है. याचिका में गृह मंत्रालय की जीरो एफआईआर और ई FIR से जुड़ी एसओपी का भी हवाला दिया गया. हालांकि साकेत कोर्ट मामले पर 15 जुलाई को आगे सुनवाई करेगी.
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