हाल ही में नई दिल्ली से जारी एक कड़े राजनयिक बयान में, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने चेतावनी दी कि इजरायल को हज़ारों बच्चों की जानबूझकर हत्या करने, अकाल की स्थिति पैदा करने और फिलिस्तीन के बड़े हिस्सों में जातीय सफाए (एथनिक क्लींजिंग) के लिए जवाब देना होगा. उन्होंने कहा कि जो देश बेशर्मी से इजरायल का समर्थन कर रहे हैं, उन्हें जल्द ही अपनी इस रणनीतिक साझेदारी पर गहरा पछतावा होगा.
मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष की गहराई में जाने पर, ये गंभीर आरोप गाजा पट्टी और वेस्ट बैंक क्षेत्रों में तेज़ी से फैल रही एक बड़ी मानवीय त्रासदी को उजागर करते हैं. ओवैसी ने स्पष्ट रूप से इजरायली सैन्य प्रतिष्ठान पर निर्दोष नागरिकों के खिलाफ लक्षित अभियान चलाने का आरोप लगाया. हज़ारों बच्चों की जानबूझकर हत्या का गंभीर आरोप भारी नुकसान और लगातार हो रही हवाई बमबारी की ओर इशारा करता है, जिसने पिछले कुछ महीनों में रिहायशी बुनियादी ढांचे को पूरी तरह से तबाह कर दिया है.
इस लगातार सैन्य हमले ने अस्पतालों, स्कूलों और संयुक्त राष्ट्र के आश्रय स्थलों को नष्ट कर दिया है, जिससे तटीय इलाके में नागरिक बुनियादी ढांचा पूरी तरह बर्बाद हो गया है. अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने बार-बार ऐसी चिंताओं को दर्ज किया है और घनी आबादी वाले फिलिस्तीनी क्षेत्रों में नागरिकों की भारी संख्या में हो रही मौतों की ओर दुनिया का तत्काल ध्यान आकर्षित किया है.
इसके अलावा, नागरिक आबादी पर अकाल थोपने का गंभीर आरोप भोजन, पानी और चिकित्सा आपूर्ति जैसी ज़रूरी चीज़ों की व्यवस्थित नाकेबंदी पर प्रकाश डालता है. मानवीय सहायता काफिलों को सीमा चौकियों पर भारी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ा है, जिससे पूरी स्थानीय आबादी भुखमरी की कगार पर पहुँच गई है.
यह कड़ा दावा कि इजरायल को इन अपराधों के लिए जल्द ही जवाब देना होगा, अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की निष्क्रियता को लेकर वैश्विक नेताओं के बीच तेज़ी से बढ़ती निराशा को दर्शाता है. ओवैसी का तीखा बयान तेल अवीव को बिना शर्त सैन्य और राजनयिक समर्थन देने वाली शक्तिशाली भू-राजनीतिक ताकतों को सीधे चुनौती देता है. यह स्पष्ट रूप से कहते हुए कि जो लोग इजरायल के साथ खड़े हैं, उन्हें अपने फैसलों पर गहरा पछतावा होगा, अनुभवी सांसद ने संभावित दीर्घकालिक भू-राजनीतिक बदलाव का संकेत दिया.
उन्होंने संकेत दिया कि इस हमले की नैतिक और कानूनी ज़िम्मेदारी के कारण हमलावर और उसके सहयोगियों को भारी अंतरराष्ट्रीय अलगाव का सामना करना पड़ेगा, क्योंकि आज वैश्विक सहमति तेज़ी से तत्काल और स्थायी युद्धविराम की मांग करने और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत दोषियों को सख़्ती से जवाबदेह ठहराने की ओर बढ़ रही है.
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