ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने भारत-पाकिस्तान के बीच सीजफायर में चीन के मध्यस्थता के दावे पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. हैदराबाद सांसद ने कहा कि चीन के इस दावे पर भारत चुप नहीं बैठा रह सकता. उन्होंने मोदी सरकार से आधिकारिक तौर पर इस दावे के खंडन की मांग की है.
एआईएमआईएम सांसद ओवैसी ने एक्स पर कई पोस्ट कर चीन के दावे को लेकर मोदी सरकार से तीखे सवाल पूछे. उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति के सीजफायर की घोषणा और शांति सुनिश्चित करने के लिए व्यापारिक पाबंदियों के इस्तेमाल के दावे के बाद अब चीन के विदेश मंत्री ने आधिकारिक तौर पर इसी तरह के दावे किए हैं. यह भारत का अपमान है और सरकार को इसका कड़ाई से जवाब देना चाहिए. चीन के साथ संबंधों में सुधार भारत के सम्मान और संप्रभुता की कीमत पर नहीं किया जा सकता.
चीन के दावों पर ओवैसी ने उठाए सवालऑपरेशन सिंदूर के बाद मोदी सरकार की ओर से दुनियाभर के देशों में भेजे गए प्रतिनिधिमंडल का असदुद्दीन ओवैसी हिस्सा रह चुके हैं. उनका कहना है कि चीन, भारत और पाकिस्तान को एक ही स्तर पर रखना चाहता है और खुद को दक्षिण एशिया में श्रेष्ठ साबित करना चाहता है. उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या जब प्रधानमंत्री चीन गए थे, तब मोदी सरकार इसी पर तैयार हुई थी.
केंद्र सरकार ने किया खंडनचीन के विदेश मंत्री के भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष में मध्यस्थता करने के दावे का बुधवार (31 दिसंबर, 2025) को केंद्र सरकार ने खंडन किया है. सरकार पहले भी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ऐसे ही दावों को खारिज कर चुकी है. अधिकारियों का कहना है कि किसी भी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता के खिलाफ भारत का स्टैंड नहीं बदला है.
क्या कहा था थी चीनी विदेश मंत्री ने चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने एक संबोधन में दावा किया था कि लंबे समय की शांति बहाली के लिए हमने एक निष्पक्ष और न्यायसंगत रुख अपनाया है, जिसमें लक्षणों और मूल कारणों दोनों को दूर करने पर फोकस किया गया है. विवादित मुद्दों के समाधान के लिए चीन की ओर से अपनाए गए दृष्टिकोण की वजह से हमनें पाकिस्तान और भारत के बीच तनाव में मध्यस्थता की.
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