लोकसभा के बाद अब राज्यसभा से भी एंटी पेपर लीक बिल पास हो गया है. विपक्षी सांसदों के वॉकआउट करने के बाद ध्वनि मत से इस बिल को राज्यसभा से भी पारित किया. दोनों सदनों से पास होने के बाद अब यह बिल कानून बनने से बस एक कदम दूर है. राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह कानून बन जाएगा. इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की. इस बिल में अधिक सख्त सजा का प्रस्ताव है. इस कानून का मकसद ऐसे लोगों, संगठित समूहों और संस्थाओं को अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने और अपराध करने से प्रभावी ढंग से रोकना है, जिससे सार्वजनिक परीक्षाओं की ईमानदारी पर बुरा असर पड़ता है.

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बिल में क्या-क्या प्रावधान?

इस बिल के प्रावधान के तहत, परीक्षाओं में पेपर लीक या अनुचित तरीकों में शामिल पाए गए लोगों को कम से कम पांच साल और अधिकतम 10 साल तक जेल जाना पड़ सकता है और उन पर 50 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. संगठित अपराधों के लिए, विधेयक में कम से कम सात साल की सजा और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रस्ताव है. एआई की मदद से नकल करना, परीक्षा प्रणाली को हैक करना, ऑनलाइन पेपर सेंड करना और साइबर फ्रॉड भी इस कानून के दायरे में आएगा.

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यह मुद्दा देश के हर परिवार से जुड़ा हुआ: जितेंद्र सिंह

राज्यसभा में एंटी पेपर लीक बिल पेश करते हुए केंद्रीय जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह मुद्दा देश के हर परिवार से जुड़ा हुआ है. उन्होंने कहा, 'पीएम मोदी जब विकसित भारत 2047 की बात करते हैं तो उसमें हमारे ये बच्चे बड़ा निवेश हैं. हमारे विपक्ष नेता ने फिर से 152 पेपर लीक की बात कही ,लेकिन उसे ऑथेंटिकेट नहीं कर सके.' जितेंद्र सिंह ने कहा कि मैनेजमेंट कोटा खत्म कर प्रधानमंत्री ने मेडिकल शिक्षा को सबके लिए सुलभ बनाया.'

मल्लिकार्जुन खरगे ने दिया ये सुझाव

इससे पहले राज्यसभा में गुरुवार को इस बिल पर चर्चा के दौरान जमकर हंगामा हुआ. राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रश्न पत्र लीक मामलों को रोकने के लिए सरकार द्वारा लाये गये विधेयक को लेकर एक वार्षिक परीक्षा कैलेंडर बनाये जाने का सुझाव दिया. उन्होंने हाल में हुए छात्र आंदोलन में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई ज्यादतियों की न्यायिक जांच कराने की मांग की.