आंध्र प्रदेश सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है, जिसमें ट्रेंड पोस्टग्रेजुएट आयुर्वेदिक डॉक्टरों को कुछ खास सर्जरी खुद से करने की अनुमति दे दी गई है. यह फैसला प्राचीन आयुर्वेदिक सिस्टम को मॉडर्न मेडिसिन के साथ जोड़ने के उद्देश्य से लिया गया है. लेकिन इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने इस आदेश का कड़ा विरोध किया है. IMA का कहना है कि यह मरीजों के लिए खतरनाक हो सकता है और दोनों सिस्टम को मिलाना गलत है.

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सरकार का फैसला और क्या अनुमति दी गई?

आंध्र प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सत्य कुमार यादव ने इस आदेश को मंजूरी दी है. यह फैसला 2020 के इंडियन मेडिसिन सेंट्रल काउंसिल (पोस्ट ग्रेजुएट आयुर्वेदा एजुकेशन) अमेंडमेंट रेगुलेशंस और नेशनल कमीशन फॉर इंडियन सिस्टम्स ऑफ मेडिसिन (NCISM) के दिशानिर्देशों के मुताबिक लिया गया है. इसके तहत ट्रेंड पोस्टग्रेजुएट आयुर्वेदिक डॉक्टर (खासकर शल्य तंत्र और शालाक्य तंत्र में स्पेशलाइजेशन वाले) अब 58 तरह की सर्जरी खुद से कर सकेंगे.

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स्वास्थ्य मंत्री ने आयुष विभाग के डायरेक्टर के दिनेश कुमार और अन्य अधिकारियों के साथ बैठक की. उन्होंने राज्य में पोस्टग्रेजुएट कोर्स शुरू करने, ऑपरेशन थिएटर, सर्जिकल इंस्ट्रूमेंट्स और जरूरी सुविधाएं देने के निर्देश भी दिए. राज्य में अभी डॉ. एनआरएस गवर्नमेंट आयुर्वेद कॉलेज, विजयवाड़ा** के अलावा दो प्राइवेट आयुर्वेद कॉलेज हैं.

कौन सी सर्जरी करने की इजाजत मिली है? 

58 सर्जरी में 39 सर्जरी शल्य तंत्र (जनरल सर्जरी) से जुड़ी हैं. बाकी 19 सर्जरी शालाक्य तंत्र से जुड़ी हैं, जिसमें आंख, कान, नाक, गला, सिर और मुंह-दांत का इलाज शामिल है.

संक्रामक बीमारियों का इलाज, घावों की सिलाई करना, बवासीर और फिशर का इलाज, स्किन ग्राफ्टिंग, सिस्ट और ट्यूमर निकालना, मोतियाबिंद का ऑपरेशन, एक्सीडेंट से डैमेज टिश्यू हटाना आदि जैसी कुछ मुख्य सर्जरी और प्रोसीजर में शामिल हैं.

इस फैसले का IMA विरोध क्यों कर रहा है?

IMA के प्रेसिडेंट डॉ. दिलीप पी. भानुशाली ने इस आदेश को 'रियली डिस्टरबिंग' बताया और कहा कि यह 'मिक्सोपैथी' (दोनों सिस्टम को मिलाना) है, जिसका IMA पिछले 10 साल से विरोध कर रहा है. उन्होंने कहा, 'हम आयुर्वेद का सम्मान करते हैं, लेकिन इसे अपने मूल और असल रूप में बढ़ावा देना चाहिए. मॉडर्न मेडिसिन के साथ क्यों मिलाएं?'

IMA का मानना है कि यह फैसला मरीजों के लिए मुश्किलें पैदा करेगा और यह एक बड़ी गलती होगी. डॉ. दिलीप कहते हैं, 'सर्जरी कोई आसान स्किल नहीं है. इसे सीखने में MBBS डॉक्टरों को लगभग 10 साल लगते हैं. आयुर्वेदिक डॉक्टरों को अलग साइंस के आधार पर ट्रेनिंग दी जाती है. IMA इस पर मेमोरेंडम देकर विरोध दर्ज कराएगा. यह मुद्दा 27-28 दिसंबर 2025 को अहमदाबाद में होने वाली 100वीं ऑल इंडिया मेडिकल कॉन्फ्रेंस का मुख्य एजेंडा होगा.'

नए फैसले पर राज्य सरकार का तर्क क्या है?

यह फैसला 23-24 दिसंबर 2025 के आसपास लिया गया और 26 दिसंबर 2025 को IMA ने अपना विरोध दर्ज किया. सरकार का कहना है कि इससे हेल्थकेयर बेहतर होगा और प्राचीन ज्ञान को मॉडर्न तरीके से जोड़ा जाएगा, लेकिन IMA इसे मरीजों की सुरक्षा के लिए खतरा मान रहा है. पहले भी IMA ने जून 2025 में 'मिक्सोलॉजी' का विरोध किया था और JIPMER, पॉन्डिचेरी में BAMS-MBBS मिक्स कोर्स की निंदा की थी.