नई दिल्ली: देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए सरकार हर तरह से कोशिश कर रही है और देश की अर्थव्यवस्था में दूध और उससे जुड़े प्रोडक्ट्स का भी एक अहम रोल है. दूध एक ऐसी चीज है जो हर घर में इस्तेमाल किया जाता है. लॉकडाउन के दौरान जहा सभी फैक्ट्री बन्द रही, वहीं दूध और उससे जुड़े प्रोडक्ट्स का उत्पादन लगातार होता रहा. आज हम आपको बताएंगे आनंदा मिल्क प्लांट के बारे में कि यहां कैसे दूध और उससे जुड़े प्रोडक्ट का उत्पादन किया जा रहा है और कोरोना के इस संकट काल में कितनी सावधानी बरती जा रही है.
एबीपी न्यूज़ की टीम जैसे ही हापुड़ के आनंदा मिल्क प्लांट में पहुंची. वहां बाहर ही हमारी गाड़ी को पूरा सेनेटाइज किया गया. गाड़ी में बैठे ड्राइवर का टेम्प्रेचर चेक किया गया और सेनेटाइजर दिया गया. इसके बाद हमारे संवाददाता मनोज वर्मा का टेम्प्रेचर चेक किया गया सेनेटाइजर दिया गया और अंदर जाने से पहले पूरी बॉडी सेनेटाइज की गई. बॉडी सैनिटाइज करने के लिए गेट पर ही एक बॉक्स बनाकर उसमें स्प्रे मशीन लगाई गई है जो पूरी बॉडी पर स्प्रे करती है और ये प्रोसेस हर उस शख्स के लिए है जो भी प्लांट में दाखिल होता है.
इसके बाद अंदर हमारी मुलाकात हुई आनंदा मिल्क प्लांट के सीनियर जीएम एस के जाना से एस के जाना ने हमें पूरे प्लांट के बारे में जानकारी दी कि कैसे इस कोरोना नाम की इस खतरनाक महामारी के दौरान सरकार की गाइडलाइंस पूरी की जा रही है और कैसे सुरक्षित तरीके से पूरे प्लांट को चलाया जा रहा है. इन्होंने हमे बताया कि दूध की जो भी गाड़ी आती है उसे पहले सेनेटाइज किया जाता है फिर वो अंदर आती है. यह वह दूध होता है जो पहले फार्मर के पास से मिल्क फिलिंग सेंटर में पहुंचता है और उसके बाद प्लांट में आता है. सबसे पहले इस फ्रॉम मिल्क की सैंपलिंग की जाती है. जब क्वालिटी डिपार्टमेंट दूध का टेस्ट करने के बाद उसे पास करता है उसके बाद ही दूध को प्लांट में लिया जाता है.
इसके बाद दूध मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में जाता है. लेकिन वहां जाने से पहले भी सारी सावधानियां बरती जाती है. मैन्युफैक्चरिंग यूनिट के गेट पर एक गार्ड खड़ा होता है. जो भी शख्स अंदर जाता है उसको पहले सेनेटाइज किया जाता है उसे पहनने के लिए कैप दी जाती है. एप्रन दिया जाता है रजिस्टर एंट्री करवाई जाती है और फिर अंदर जाने दिया जाता है. इस पूरे प्रोसेस को पार करते हुए एबीपी न्यूज़ की टीम पहुंची मैन्युफैक्चरिंग यूनिट के अंदर जहां दूध की प्रोसेसिंग की जा रही थी जो दूध बाहर से आया था वो मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में एक ऑटोमेटिक सिस्टम के द्वारा प्रोसेसिंग में लाया जाता है. यहां पर दूध की प्रोसेसिंग होने के बाद दूध को अलग-अलग डिपार्टमेंट को दे दिया जाता है. अलग-अलग प्रोडक्ट तैयार करने के लिए.
इस पूरे प्लांट के दौरे पर हमने पाया कि जितने भी कर्मचारी काम कर रहे थे वह सभी सरकार की गाइडलाइंस को फॉलो कर रहे थे जैसे कि सभी ने मास्क लगाए हुए थे. कैप पहनी हुई थी और सभी के हाथों में ग्लव्स भी थे. इसके अलावा थोड़ी थोड़ी देर बाद सभी कर्मचारी हाथों को सेनेटाइज भी कर रहे थे.
आनंदा मिल्क प्लांट के सीनियर जनरल मैनेजर एसके जाना ने हमें बताया कि दूध और दूध से जुड़े प्रोडक्ट देश की अर्थव्यवस्था में बहुत ही अहम भूमिका निभाते हैं. उन्होंने हमे बताया कि "दूध और दूध के प्रोडक्ट की देश की अर्थव्यवस्था में बहुत अहम भूमिका है क्योंकि इंडिया एग्रीकल्चर देश देश है. दूध के बिना तो हमारे रोज के जीवन की शुरुआत नहीं हो पाती है दूध की भूमिका बहुत अहम है.
इतना ही नहीं उन्होंने ये भी बताया कि जब सरकार की तरफ से लॉकडाउन किया गया. उसके बाद भी प्लांट बंद नहीं किया गया लोगों की जरूरतों को देखते हुए प्लांट को चालू रखा गया. दूध और उससे जुड़े प्रोडक्ट का उत्पादन होता रहा और लगातार सप्लाई भी होती रही ताकि लोगों को परेशानी ना हो.
एसके जाना के मुताबिक उन्होंने सरकार की सभी गाइडलाइंस को ध्यान में रखते हुए प्लांट को चालू रखा. लगातार पूरे प्लांट की सैनिटाइजेशन की जाती है. सभी कर्मचारियों का ध्यान रखा जाता है. मेन गेट से सैनिटाइजेशन शुरू होता है और प्लांट के अंदर आने तक सैनिटाइजेशन और सरकार की गाइडलाइंस का पालन किया जाता है. इनके मुताबिक आनंदा प्लांट में 600 के करीब कर्मचारी काम करते हैं लेकिन लॉकडाउन को देखते हुए अभी सिर्फ 200 कर्मचारी ही काम कर रहे हैं. आनंदा मिल्क प्लांट दूध और दूध से जुड़े करीब 75 प्रोडक्ट बना रहा है इतना ही नहीं कोरोनावायरस को देखते हुए आनंदा मिल्क प्लांट ने कुछ नए प्रोडक्ट भी लांच किए हैं जो लोगों की इम्यूनिटी पावर को बढ़ाने के लिए बनाए गए हैं.