भोपाल: युवराज के नाम से प्रसिद्ध कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह के बेटे जयवर्धन सिंह आज मध्य प्रदेश में कमलनाथ सरकार में मंत्री बने हैं. कमलनाथ सरकार में आज 28 मंत्रियों ने पद और गोपनीयता की शपथ ली है. 32 साल के जयवर्धन सिंह राघोगढ़ के युवराज हैं. जयवर्धन आज से शुरू हुई इस नई पारी के बाद मध्य प्रदेश की सियासत में उभरते हुए नेता के तौर पर स्थापित हो गये हैं.

जयवर्धन सिंह उस राघोगढ़ सीट से दूसरी बार विधायक बने हैं जो उनकी खानदानी सीट मानी जाती है. जयवर्धन सिंह भले ही तालुल्क राज परिवार से रखते हैं, लेकिन इलाके में उनकी छवि जमीन से जुड़े नेता की है. जयवर्धन सिंह जब सिर्फ विधायक हुआ करते थे तब क्षेत्र में रहने के दौरान रोज जनता दरबार लगाया करते थे. इसी तरह इलाके के सैकड़ों लोग रोज अपनी समस्या लेकर यहां पहुंचते और फिर किसी मंझे हुए राजनेता की तरह बारी बारी से सब से मिला करते थे. हर मुलाकाती की डायरी में समस्या के साथ एंट्री होती थी.

जयवर्धन सिंह के पिता दिग्विजय सिंह को जोड़ तोड़ की राजनीति में महारथ हासिल है. दिग्विजय को चुनावी राजनीति का चाणक्य माना जाता है, लेकिन इस स्वभाव के ठीक उलट जयवर्धन सिंह शांत और सौम्य माने जाते हैं. वोटिंग के दिन जयवर्धन अपने बूथ पर लाइन में लगकर एक सामान्य वोटर की तरह वोट डालने पहुंचे थे.

जयवर्धन की भगवान में भी अटूट आस्था है. वोटिंग वाले दिन पत्नी और छोटे बेटे के साथ पूजा के लिए किले के मंदिर पर गये थे. साल 2015 में जयवर्धन सिंह की शादी बिहार के एक राज परिवार में हुई थी. शादी के बाद हुए समारोह में पीएम मोदी भी मेहमान बने थे.

दून स्कूल से शुरूआती पढ़ने करने वाले जयवर्धन दिल्ली और अमेरिका में भी पढ़ चुके हैं. ऊंची तालिम हासिल करने के बाद भी जयवर्धन ने अपने पिता की राह को ही अपना रास्ता बनाया और अब उसी रास्ते पर चलते हुए सत्ता के इस शिखर पर पहुंचे हैं.

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