लोकसभा में एफसीआरए बिल को लेकर टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने बुधवार (12 अगस्त) को बयान दिया है. उन्होंने यह बयान FCRA बिल को जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी के पास भेजने को लेकर दिया है. टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा है कि यह बिल (FCRA) इसलिए लाया गया है ताकि, बीजेपी यह पक्का कर सके कि सारी फंडिंग सिर्फ आरएसएस को ही मिले.

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उन्होंने कहा, आरएसएस एनजीओ है. लेकिन यह रजिस्टर्ड नहीं है. आरएसएस के पास दिल्ली के हर जिले में हजारों करोड़ की प्रॉपर्टी है. इसका ऑडिट नहीं होता है. जो भी आरएसएस से जुड़ा नहीं है, उसका गला घोंट दिया जाएगा. वे लाइसेंस रद्द करेंगे, जैसा कि हमने कई मामलों में देखा है. फिर वे इन संगठनों की संपत्ति पर कब्जा कर लेंगे. 

उन्होंने कहा कि यह संगठनों की संपत्ति, कैश और पैसे पर कब्जा करने और जमीन हड़पने का एक और तरीका है. हमने एकमत होकर कहा था कि इस बिल को वापस लिया जाएगा. 

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हम बोलना चाहते थे, उन्होंने हमें बोलने नहीं दिया: मोइत्रा

उन्होंने कहा कि सरकार प्रोपेगेंडा था कि विपक्ष में मतभेद है, कुछ लोग यह चाहते हैं, कुछ वह. यह पूरी तरह बकवास है. आज जब हंगामे के बीच यह बिल आया, तो विपक्ष की हर पार्टी ने इसे JPC के पास भेजने का समर्थन किया. हम बोलना चाहते थे. उन्होंने हमें बोलने नहीं दिया. चेयर ने हमें अपनी बात रिकॉर्ड पर रखने की भी इजाजत नहीं दी. हम साफ तौर पर कहना चाहते हैं कि हम इस बिल को पूरी तरह वापस करवाना चाहते थे. इसके अलावा और कोई बात नहीं है.

क्या है इस बिल के भीतरइस साल जून में सरकार ने विदेश धन प्राप्त करने के लिए FCRA के नियमों में संशोधन की अधिसूचना जारी की थी. इसके तहत गैर सरकारी संगठनों पहले निर्धारित उद्देश्यों और कार्यक्षेत्रों में से किसी एक का चयन करना अनिवार्य था. इन नियमों में धार्मिक आस्था से जुड़ी कई गतिविधियों की अनुमति दी गई है. एफसीआरए के तहत रजिस्ट्रेशन के लिए पात्र कई श्रेणियों में धर्म-प्रचार को बाहर रखा गया है. 

FCRA अमेंडमेंट बिल, 2026 इस साल 25 मार्च को लोकसभा में पेश किया गया था. इधर, मानसून सेशन में इस पर चर्चा होने की उम्मीद थी. हालांकि विपक्ष के हंगामे के चलते कोई खास विधायी काम नहीं हो सका है. सरकार ने इस बिल को जेपीसी के पास भी भेजा है.