✕
  • होम
  • इंडिया
  • विश्व
  • उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड
  • बिहार
  • दिल्ली NCR
  • महाराष्ट्र
  • राजस्थान
  • मध्य प्रदेश
  • हरियाणा
  • पंजाब
  • झारखंड
  • गुजरात
  • छत्तीसगढ़
  • हिमाचल प्रदेश
  • जम्मू और कश्मीर
  • बॉलीवुड
  • ओटीटी
  • टेलीविजन
  • तमिल सिनेमा
  • भोजपुरी सिनेमा
  • मूवी रिव्यू
  • रीजनल सिनेमा
  • क्रिकेट
  • आईपीएल
  • कबड्डी
  • हॉकी
  • WWE
  • ओलिंपिक
  • धर्म
  • राशिफल
  • अंक ज्योतिष
  • वास्तु शास्त्र
  • ग्रह गोचर
  • एस्ट्रो स्पेशल
  • बिजनेस
  • हेल्थ
  • रिलेशनशिप
  • ट्रैवल
  • फ़ूड
  • पैरेंटिंग
  • फैशन
  • होम टिप्स
  • GK
  • टेक
  • ट्रेंडिंग
  • शिक्षा
  • ऑटो

किससे खौफ खाता था अकबर, अजमेर की तरफ कदम रखना ही छोड़ दिया?

एबीपी न्यूज़ डेस्क   |  अविनाश झा  |  23 Sep 2025 12:42 PM (IST)

अकबर ने 12 साल तक अजमेर में ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर लगातार यात्रा की, लेकिन 1579 के बाद बंद कर दी. इतिहासकारों के अनुसार, अकबर का धार्मिक दृष्टिकोण बदल गया था.

किससे खौफ खाता था अकबर, अजमेर की तरफ कदम रखना ही छोड़ दिया?

(प्रतीकात्मक तस्वीर)

भारत के महान मुगल सम्राट अकबर ने लगभग 12 साल तक लगातार अजमेर की यात्राएं की और ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर हाजिरी लगाई, लेकिन 1579 के बाद अचानक उसने अजमेर जाना बंद कर दिया. सवाल यह है कि आखिर क्यों? इतिहासकारों का कहना है कि अकबर का धार्मिक नजरिया धीरे-धीरे बदल रहा था. वह केवल इस्लाम तक सीमित नहीं रहना चाहता था, बल्कि सभी धर्मों को मिलाकर एक नया रास्ता बनाना चाहता था. इसी सोच से उसने दीन-ए-इलाही की शुरुआत की.

अब्दुल क़ादिर बदायूंनी ने क्या कहा? मुल्ला अब्दुल क़ादिर बदायूंनी ने अपनी किताब मुन्तख़ब-उत-तवारीख़ में लिखा है कि अकबर की दरगाह पर आस्था को देखकर कुछ लोग मुस्कुराए और बोले, "कितनी हैरानी की बात है कि बादशाह ख्वाजा में विश्वास करता है लेकिन पैगंबर की राह छोड़ चुका है." बदायूनी ने व्यंग्यात्मक कविताओं के जरिए अकबर पर निशाना साधा और कहा कि यह रवैया मुसलमानों को नाराज कर रहा था. इतिहासकारों का मानना है कि इस समय तक अकबर के धार्मिक विचार बदल चुके थे. वह किसी एक धर्म में विश्वास करने के बजाय “मानव धर्म” की ओर बढ़ रहा था. यही वह दौर था जब उसने दीन-ए-इलाही की नींव रखी. अकबर स्वयं को अल्लाह का दूत मानने लगा था.

मुल्लाओं ने अकबर के इस रुख पर दी तीखी प्रतिक्रिया मुल्लाओं ने अकबर के इस रुख पर तीखी प्रतिक्रिया दी. कई ने उसके खिलाफ फतवे जारी किए और यहां तक कि उसके भाई हकीम मिर्ज़ा को गद्दी पर बैठाने की योजना भी बनाई. इसी विवाद के कारण अकबर ने अजमेर यात्राएँ बंद कर दीं. हालांकि उसने अजमेर से अपना संबंध पूरी तरह नहीं तोड़ा. 1580 में अकबर ने अब्दुर्रहीम खानखाना को अजमेर का नाजिम नियुक्त किया और उसी वर्ष अपने पुत्र मिर्ज़ा दानियाल को दरगाह पर भेजा. दानियाल ने वहाँ फ़क़ीरों में 25,000 रुपये बांटे. बाद में अकबर की पत्नी सलीमा बेगम और उसकी बहनें भी अजमेर पहुंचीं, जिन्हें शहजादा सलीम सुरक्षा के साथ आगरा लेकर आया. इतिहासकार मानते हैं कि 1579 के बाद अकबर का ध्यान धार्मिक आस्था से हटकर अपने नए विचारों और सत्ता को मजबूत करने पर केंद्रित हो गया था. यही वजह रही कि उसने अजमेर की लगातार यात्रा पूरी तरह बंद कर दीं.

ये भी पढ़ें-

Kolkata Heavy Rainfall: कोलकाता में आसमान से बरस रही आफत, बह गया पूरा शहर, अब तक 7 लोगों की मौत

Published at: 23 Sep 2025 12:42 PM (IST)
Tags:AkbarAjmerDin-e-Ilahi
  • हिंदी न्यूज़
  • न्यूज़
  • इंडिया
  • किससे खौफ खाता था अकबर, अजमेर की तरफ कदम रखना ही छोड़ दिया?
About us | Advertisement| Privacy policy
© Copyright@2026.ABP Network Private Limited. All rights reserved.