GE एयरोस्पेस रिपोर्ट ने खोले अहमदाबाद विमान हादसे के राज! सामने आएगा 260 मौतों का सबसे बड़ा सच?
अमेरिकी कंपनी GE एयरोस्पेस ने एअर इंडिया के बोइंग 787 ड्रीमलाइनर विमान हादसे से जुड़ी अपनी इंजन एनालिसिस रिपोर्ट का बड़ा हिस्सा एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो यानी AAIB को सौंप दिया है.

अहमदाबाद में हुए एअर इंडिया विमान हादसे की जांच में अब बड़ा अपडेट जल्द आने की उम्मीद है. एक साल से चल रही इस जांच में अब आखिरी और सबसे जरूरी कड़ी जुड़ गई है. सूत्रों के मुताबिक अमेरिकी कंपनी GE एयरोस्पेस ने एअर इंडिया के बोइंग 787 ड्रीमलाइनर विमान हादसे से जुड़ी अपनी इंजन एनालिसिस रिपोर्ट का बड़ा हिस्सा एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो यानी AAIB को सौंप दिया है.
यह विमान 12 जून 2025 को अहमदाबाद में टेकऑफ के कुछ ही सेकंड बाद क्रैश हो गया था जिसमें 260 लोगों की जान चली गई थी. GE एयरोस्पेस इस विमान के इंजन बनाने वाली कंपनी है, इसलिए उसकी रिपोर्ट इस जांच में काफी अहम मानी जा रही है और इसे मिल जाने के बाद फाइनल रिपोर्ट का रास्ता काफी हद तक साफ हो गया है.
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क्या हुआ है अभी?
GE एयरोस्पेस ने अपनी इंजन एनालिसिस रिपोर्ट का तकनीकी हिस्सा AAIB को सौंप दिया है, जिससे जांच के लिए जरूरी इनपुट मिल गए हैं और फाइनल रिपोर्ट को आखिरी रूप दिया जा रहा है. हादसे की पहली बरसी 12 जून 2026 को AAIB ने अंतरिम बयान में कहा था कि विमान के सिस्टम, फ्लाइट रिकॉर्डर डेटा, इंजन पुर्जों और मेंटेनेंस रिकॉर्ड की गहन जांच हुई है. AAIB ने स्पष्ट किया था कि फाइनल रिपोर्ट सभी जांच प्रक्रियाओं, अंतरराष्ट्रीय समीक्षा और सलाह-मशविरों के बाद ही जारी होगी, जैसा ICAO के एनेक्स 13 में तय है. इसलिए रिपोर्ट की कोई निश्चित तारीख अभी तय नहीं है.
कब हुआ था हादसा?
12 जून 2025 को अहमदाबाद से लंदन गैटविक जा रही एअर इंडिया की फ्लाइट टेकऑफ के 32 सेकंड बाद क्रैश हो गई और बीजे मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल पर जा गिरी. विमान में सवार 230 यात्रियों और 12 क्रू मेंबर में सिर्फ एक यात्री बचा, जबकि जमीन पर 19 लोगों की मौत हुई. जुलाई 2025 की शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार, टेकऑफ के तुरंत बाद दोनों फ्यूल कंट्रोल स्विच रन से कटऑफ पोजीशन में चले गए, जिससे दोनों इंजन बंद हो गए. कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डिंग में एक पायलट दूसरे से कटऑफ करने का कारण पूछता है, जबकि दूसरा इससे इनकार करता है. रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि किस पायलट ने क्या कहा. विमान में GE के GEnx-1B70 इंजन लगे थे, जिन्हें हादसे से तीन महीने पहले ही लगाया गया था.
विवाद और सवाल
जुलाई 2025 की शुरुआती रिपोर्ट के बाद विवाद हुआ था. फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स (FIP) ने AAIB से बोइंग और एअर इंडिया का अतिरिक्त तकनीकी डेटा जुटाने की मांग की थी, ताकि पायलट सुसाइड थ्योरी को खारिज किया जा सके. इंडियन कमर्शियल पायलट्स एसोसिएशन ने भी पायलट की गलती की ओर इशारा करने वाली बातों पर सवाल उठाए थे. यह मामला सिर्फ टाटा ग्रुप की प्राइवेट कंपनी एअर इंडिया तक सीमित नहीं है. AAIB की फाइनल रिपोर्ट पर दुनियाभर के एयरक्राफ्ट, इंजन निर्माताओं और एविएशन इंश्योरेंस कंपनियों की नजर है. तकनीकी खराबी सामने आने पर बोइंग 787 की नई जांच, सख्त मेंटेनेंस नियम, बढ़ी लागत और लंबे कॉन्ट्रैक्ट प्रभावित हो सकते हैं.
आगे क्या देखना जरूरी है
इस मामले में आगे दो बातों पर नजर रखना जरूरी रहेगा. पहला यह कि एविएशन रेगुलेटर बोइंग 787 के बेड़े को लेकर कोई नया निर्देश जारी करते हैं या नहीं. दूसरा यह कि रिपोर्ट आने के बाद विमान और इंजन बनाने वाली कंपनियों को लेकर कोई कानूनी या इंश्योरेंस से जुड़ा मामला सामने आता है या नहीं.
260 परिवारों के लिए अभी भी इंतजार
इस हादसे में जान गंवाने वाले 260 लोगों के परिवार एक साल से ज्यादा वक्त से यही जानना चाहते हैं कि उनके अपनों की मौत आखिर किस वजह से हुई. GE एयरोस्पेस ने अपनी इंजन की तकनीकी रिपोर्ट AAIB को जितनी भी भेजी हो लेकिन कंपनी की तरफ से अभी तक इस पर कोई सार्वजनिक बयान या जवाब नहीं आया है. ना यह बताया गया है कि रिपोर्ट में इंजन को लेकर क्या निकला, ना ही कंपनी ने इस पर सफाई दी है.
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