नई दिल्ली: राफेल डील में घोटाले के दावों के बीच वायुसेना प्रमुख बीएस धनोआ ने कहा है कि राफेल लड़ाकू विमान गेमचेंजर साबित होगा. उन्होंने राफेल विमान की संख्या 126 से घटाकर 36 किये जाने और वायुसेना को इसकी जानकारी दिये जाने के सवाल पर कहा कि उचित स्तर पर भारतीय वायुसेना से परामर्श किया गया था. भारतीय वायुसेना ने कुछ विकल्प दिए थे. उनमें से चुनाव करना सरकार का काम है.
उन्होंने राफेल बनाने वाली कंपनी दसॉल्ट का भारतीय साझेदार बनाए जाने के विवाद पर कहा कि दसॉल्ट को ऑफसेट साझेदार का चयन करना था और इसमें सरकार, भारतीय वायु सेना की कोई भूमिका नहीं थी.
दरअसल, कांग्रेस का आरोप है कि सरकार ने अनिल अंबानी को फायदा पहुंचाने के लिए फ्रांस के सामने केवल एक रिलायंस कंपनी का नाम बढ़ाया. जिसे दसॉल्ट ने स्वीकार किया. कांग्रेस का कहना है कि सरकारी कंपनी एचएएल की भी सरकार साझेदार बना सकती थी. लेकिन ऐसा नहीं किया गया. कांग्रेस के दावों को मजबूती तब और मिली थी जब फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने कहा था कि भारत सरकार ने फ्रेंच एयरोस्पेस कंपनी के लिए ऑफसेट साझेदार के रूप में केवल रिलायंस के नाम का प्रस्ताव रखा था.
मोदी ने 10 अप्रैल 2015 को पेरिस में ओलांद के साथ बातचीत के बाद 36 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने की घोषणा की थी. बीएस धनोआ ने कहा, ''राफेल अच्छा विमान है, जब यह उपमहाद्वीप में आएगा तो अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होगा.'' उन्होंने कहा कि हमें अच्छा पैकेज मिला, राफेल सौदे में कई फायदे मिले.
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वायुसेना प्रमुख ने कहा, ''सरकारों के बीच हुए सौदे के रूप में दो स्क्वाड्रन खरीदने का फैसला किया गया, ताकि इमरजेंसी आवश्यकताओं की पूर्ति की जा सके. एनएएल (HAL) को ToT (तकनीक हस्तांतरण) तथा लाइसेंसयुक्त उत्पादन के लिए शामिल किया गया था. HAL को दरकिनार कर दिए जाने का सवाल ही पैदा नहीं होता.''
उन्होंने कहा, ''राफेल और एस-400 एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम के सौदे बूस्टर डोज की तरह हैं. जब भी सरकार इसे मंजूरी दे देगी, 24 महीने के भीतर डिलीवरी हो जाएगी.''
धनोआ ने कहा, "जो कॉन्ट्रैक्ट एचएएल को पहले से दिए गए हैं, उनके डिलीवरी शेड्यूल में देरी रही है. सुखोई-30 की डिलीवरी में तीन साल की देरी हुई है. जगुआर में छह साल की देरी हुई. LCA में पांच साल की देरी हुई और मिराज 2000 अपग्रेड की डिलीवरी में दो साल की देरी हुई है."
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