महबूबनगर में एक सार्वजनिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए AIMIM प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने सोमवार (9 फरवरी) को RSS और बीजेपी पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने विशेष व्यक्तियों को भारत रत्न देने की मांग करने वालों पर तीखा प्रहार किया और चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अगर इसी तरह से इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया तो शायद भविष्य में नाथूराम गोडसे को भी यह सम्मान दे दिया जाए. 

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ओवैसी ने अपने संबोधन में आजादी की लड़ाई में मुस्लिमों के योगदान, खासकर हैदराबाद के अलाउद्दीन को याद कर इतिहास के उन पन्नों को खोला, जिन्हें भुलाने की कोशिश की जा रही है. अपने भाषण में ओवैसी ने RSS से सीधे सवाल पूछते हुए कहा, "आप इतिहास के पन्ने पलटें और देखें कि असली कुर्बानी किसने दी." 

कौन थे मौलवी अलाउद्दीनउन्होंने हैदराबाद की धरती के महान स्वतंत्रता सेनानी मौलवी अलाउद्दीन, जो मक्का मस्जिद के इमाम थे. उनका जिक्र करते हुए बताया कि कैसे रमजान के महीने में मौलवी अलाउद्दीन ने एक विशाल मजमे का नेतृत्व किया और उस समय की निजाम सरकार व अंग्रेजों के खिलाफ 'सुल्तान बाजार' में विरोध प्रदर्शन किया था. उस समय अंग्रेजों की रेजीडेंसी वहीं थी और निजाम उनके संरक्षण में काम करते थे.

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ओवैसी ने ऐतिहासिक तथ्यों को सामने रखते हुए कहा कि मौलवी अलाउद्दीन और तुर्रेबाज खान जैसे जांबाजों ने अंग्रेजों का डटकर मुकाबला किया, जिसके चलते मौलवी को गिरफ्तार कर काला पानी (अंडमान) भेज दिया गया, जहां उनकी शहादत हो गई. उन्होंने RSS पर तंज कसते हुए पूछा, "क्या काला पानी का वह पहला मुजरिम RSS का कोई व्यक्ति था या एक मुसलमान?" उन्होंने स्पष्ट किया कि मौलवी अलाउद्दीन काला पानी की सजा पाने वाले पहले व्यक्ति थे.

'मुस्लिम सपूतों को भुलाया जा रहा'उन्होंने आगे कहा कि जिस व्यक्ति (संज्ञानात्मक रूप से वीर सावरकर का जिक्र) को भारत रत्न देने की बात की जा रही है, उन्होंने अंग्रेजों को छह-छह माफीनामे लिखे थे. उन्होंने कहा कि जब मौलवी अलाउद्दीन और अल्लामा फजल-ए-हक खैराबादी जैसे विद्वानों ने कभी घुटने नहीं टेके और देश के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी तो ऐसे सपूतों को भुलाया क्यों जा रहा है? 

उन्होंने जस्टिस कपूर कमीशन का हवाला देते हुए यह भी याद दिलाया कि महात्मा गांधी की हत्या की साजिश में उन लोगों का नाम भी शामिल था जिन्हें आज खूबसूरत बताया जा रहा है. यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को लेकर राजनीतिक बहस छिड़ी हुई है और बीजेपी द्वारा सावरकर को भारत रत्न दिए जाने की मांग तेज हो रही है. 

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