One Year of Ahmedabad Flight Crash Tragedy 2025: 12 जून 2025 को अहमदाबाद से लंदन जा रही एयर इंडिया की फ्लाइट AI-171 उड़ान भरने के कुछ ही पलों बाद क्रैश हो गई थी. इस हादसे में विमान में सवार 242 लोगों में से 241 की जान चली गई थी. सिर्फ एक यात्री विश्वासकुमार रमेश जिंदा बचे थे. जमीन पर मौजूद 19 लोगों की भी मौत हुई थी यानी कुल 260 लोगों की जान गई.

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इस हादसे को एक साल पूरा हो गया है. इस एक साल में एयर इंडिया और टाटा ग्रुप ने मृतकों के परिवारों को करोड़ों रुपये का मुआवजा दिया है लेकिन इस प्रक्रिया पर अब गंभीर सवाल भी उठ रहे हैं. सबसे बड़ा सवाल उठाया है गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी की बेटी राधिका मिश्रा ने जिनके पिता भी इसी हादसे में मारे गए थे.

अब तक कितना पैसा मिला परिवारों को

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हादसे के दो दिन बाद यानी 14 जून 2025 को एयर इंडिया ने ऐलान किया था कि हर मृतक के परिवार और इकलौते जीवित बचे यात्री को 25 लाख रुपये की अंतरिम मदद दी जाएगी. यह पैसा 20 जून 2025 से परिवारों के खातों में पहुंचना शुरू हो गया था. एयरलाइन के मुताबिक 229 मृतक यात्रियों में से 209 के परिवारों यानी करीब 91 फीसदी परिवारों को और जमीन पर मारे गए सभी 19 लोगों के परिवारों को यह अंतरिम मुआवजा दिया जा चुका है. बाकी परिवारों के दस्तावेज पूरे होते ही उन्हें भी भुगतान किया जा रहा है.

इसके अलावा टाटा ग्रुप ने 500 करोड़ रुपये की राशि से AI-171 मेमोरियल एंड वेलफेयर ट्रस्ट बनाया है. इस ट्रस्ट से हर मृतक के परिवार को 1 करोड़ रुपये की अनुग्रह राशि दी जा रही है. ट्रस्ट हादसे में क्षतिग्रस्त हुए बीजे मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल को दोबारा बनाने में भी मदद कर रहा है. साथ ही मृतकों के बच्चों की पढ़ाई जैसी लंबे समय की जरूरतों में भी सहायता की योजना है.

फाइनल मुआवजे की बात करें तो एयर इंडिया ने अक्टूबर 2025 से यह प्रक्रिया शुरू की थी. एयरलाइन के मुताबिक हर मृतक के परिवार को 1.25 करोड़ रुपये से ज्यादा का फाइनल मुआवजा ऑफर किया जा रहा है. हर परिवार की रकम अलग-अलग है क्योंकि यह मृतक की उम्र, कमाई और भविष्य की कमाई की संभावना के हिसाब से तय की जाती है. 25 लाख रुपये की अंतरिम राशि इसी फाइनल मुआवजे में एडजस्ट की जाएगी. यानी मोटे तौर पर देखें तो ट्रस्ट के 1 करोड़ रुपये और फाइनल मुआवजे को मिलाकर ज्यादातर परिवारों को सवा दो करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम मिलने का अनुमान है.

फिर सवाल क्यों उठ रहे हैं ?असली विवाद फाइनल मुआवजे के साथ जुड़ी एक शर्त को लेकर है. फाइनल मुआवजा लेने के लिए परिवारों को एक कानूनी दस्तावेज पर साइन करना पड़ रहा है जिसका नाम है रिसीट डिस्चार्ज एंड इंडेम्निटी - RDI. इस दस्तावेज पर साइन करने का मतलब है कि परिवार आगे चलकर एयर इंडिया, विमान बनाने वाली कंपनी बोइंग, इंजन बनाने वाली कंपनियों जनरल इलेक्ट्रिक और हनीवेल, अहमदाबाद एयरपोर्ट और सरकारी एजेंसियों के खिलाफ कोई कानूनी दावा नहीं कर पाएंगे न अभी और न भविष्य में.

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परिवारों की सबसे बड़ी आपत्ति यह है कि हादसे की जांच अभी पूरी नहीं हुई है. Aircraft Accident Investigation Bureau की फाइनल रिपोर्ट अभी आनी बाकी है. हादसा क्यों हुआ और इसकी जिम्मेदारी किसकी है यह अब तक साफ नहीं है. ऐसे में परिवारों से कहा जा रहा है कि वे सारे तथ्य सामने आने से पहले ही अपने कानूनी अधिकार हमेशा के लिए छोड़ दें.

ब्रिटेन में 130 परिवारों का केस लड़ रही कानूनी टीम ने भी इस शर्त पर सवाल उठाए हैं. हादसे में मारे गए लोगों में 53 ब्रिटिश नागरिक थे और कई परिवारों ने ब्रिटेन की अदालतों में एयर इंडिया और बोइंग के खिलाफ मुकदमे दायर किए हैं. वकीलों का आरोप है कि फाइनल सेटलमेंट की रकम हर परिवार के लिए एक जैसी नहीं है और कुछ परिवारों को काफी कम ऑफर दिए गए हैं.

रूपाणी की बेटी ने क्या लिखा?

विजय रूपाणी की बेटी राधिका मिश्रा ने टाटा सन्स और एयर इंडिया के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन को ईमेल लिखकर इस शर्त को वापस लेने की मांग की है. उन्होंने लिखा कि जांच अभी पूरी नहीं हुई है लेकिन दस्तावेज परिवारों से मांग करता है कि वे सारे तथ्य जाने बिना ही अपने मौजूदा और भविष्य के सभी दावे हमेशा के लिए छोड़ दें. उन्होंने कंपनी से पारदर्शिता और जवाब की मांग की है. राधिका से पहले भी कुछ परिवार इस शर्त पर आपत्ति जता चुके हैं.

एयर इंडिया का क्या जवाब है

एयर इंडिया ने राधिका मिश्रा को जवाबी चिट्ठी लिखी है. एयरलाइन का कहना है कि फाइनल मुआवजा स्वीकार करने के लिए कोई डेडलाइन नहीं रखी गई है और किसी परिवार पर कोई दबाव नहीं है. एयरलाइन के मुताबिक परिवार पूरी तरह आजाद हैं कि वे जांच रिपोर्ट आने तक इंतजार करें और कुछ परिवारों ने ऐसा करने का फैसला भी किया है.

RDI दस्तावेज की भाषा पर एयरलाइन ने कहा कि यह वही तरीका है जो भारत और दुनियाभर की एयरलाइंस आमतौर पर अपनाती हैं. एयरलाइन ने यह भी कहा कि उसे बोइंग जैसी तीसरी कंपनियों को कानूनी जिम्मेदारी से बचाने में कोई दिलचस्पी नहीं है. दस्तावेज की व्यापक भाषा सिर्फ इसलिए है ताकि फाइनल सेटलमेंट वाकई फाइनल रहे और भविष्य में एयर इंडिया पर कोई सीधा या परोक्ष दावा न आए.

हादसे के बाद एयर इंडिया ने क्या कदम उठाए?

एयर इंडिया का कहना है कि हादसे के बाद उसके सुरक्षा मानकों और फ्लाइट ऑपरेशंस में कोई बदलाव नहीं किया गया है और सभी विमान पहले की तरह DGCA नियमों के तहत उड़ रहे हैं. हादसे के तुरंत बाद जून 2025 में एयरलाइन ने अपनी मर्जी से सेफ्टी पॉज लागू किया था. इसके तहत कुछ महीनों के लिए उड़ानें कम की गईं ताकि विमानों की अतिरिक्त तकनीकी जांच हो सके.

इस दौरान DGCA की निगरानी में बोइंग 787-8 और 787-9 विमानों की विस्तृत जांच हुई. एयरलाइन के मुताबिक इन जांचों में कोई तकनीकी खामी नहीं मिली. बोइंग 737 और 787-8 विमानों के फ्यूल कंट्रोल स्विच की भी खास जांच कराई गई जिसमें कोई खराबी सामने नहीं आई.

एयरलाइन ने अपने वाइडबॉडी बेड़े के लिए चल रहे रिलायबिलिटी प्रोग्राम को भी तेज किया है. पिछले एक साल में बोइंग 787 फ्लीट के रिलायबिलिटी प्रोग्राम की संख्या 36 से बढ़कर 45 हो गई है और कुल कंप्लीशन लेवल 48 फीसदी से बढ़कर 65 फीसदी तक पहुंच गया है.

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ऑडिट के मोर्चे पर एयरलाइन ने दिल्ली ऑपरेशंस का ऑडिट अब साल में दो बार करने का फैसला किया है जबकि बाकी सभी स्टेशनों का ऑडिट हर साल होगा.

कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी बड़ा फोकस किया गया है. वेलनेस डॉट एआई पहल के तहत 265 मनोवैज्ञानिकों का नेटवर्क बनाया गया है. हादसे के बाद 900 से ज्यादा केबिन क्रू सदस्यों को काउंसलिंग और स्ट्रेस मैनेजमेंट की मदद दी गई. कर्मचारियों और उनके परिवार के तीन सदस्यों तक के लिए गोपनीय थेरेपी की सुविधा भी शुरू की गई है.

फिलहाल जांच में आगे क्या होगा? हादसे की जांच अभी जारी है और AAIB की फाइनल रिपोर्ट का इंतजार है. हादसे की वजह को लेकर एयर इंडिया और बोइंग के बीच भी खींचतान चल रही है. तब तक मृतकों के परिवारों के सामने एक मुश्किल सवाल खड़ा है. फाइनल मुआवजा लेकर मामला बंद करें या जांच रिपोर्ट का इंतजार करें और कानूनी लड़ाई का रास्ता खुला रखें. राधिका मिश्रा जैसे परिवारों का कहना है कि सच जाने बिना साइन करना इंसाफ नहीं है. वहीं एयर इंडिया का कहना है कि फैसला पूरी तरह परिवारों के हाथ में है.

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