केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार (4 नवंबर 2026) को अग्निवीर योजना में बड़ा बदलाव करने की घोषणा की है. अब 4 साल बाद 25 प्रतिशत को नौकरी के साथ साथ बचे हुए 75 प्रतिशत को 2 साल अतिरिक्त एंगेजमेंट के बाद सेना में नौकरी का मौका मिलेगा. देश में युवाओं की नाराजगी और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को लेकर विपक्ष सरकार के ऊपर हमलवार है. अगले साल के शुरुआत में पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव. ऐसे में  उत्तराखंड, पंजाब और यूपी जैसे राज्यो में चुनाव से पहले अग्निवीर योजना में बदलाव को चुनाव से जोड़कर भी देखा जा रहा है.

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अग्निवीर योजना को लेकर युवाओं के बीच सबसे बड़ा सवाल रहा है 4 साल की सेवा के बाद भविष्य क्या होगा? सेना में भर्ती की तैयारी करने वाले Gen-Z के लिए स्थायी नौकरी, करियर की सुरक्षा और परिवार की जिम्मेदारी अहम मुद्दे हैं.जून 2022 में शुरू हुई अग्निपथ योजना में चार साल की सेवा के बाद अधिकतम 25 फीसदी अग्निवीरों को नियमित सेवा में रखने का प्रावधान था. बाकी 75 फीसदी को सेवा से बाहर होना था.

अग्निवीर योजना व्यवस्था में बदलाव

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सरकार ने अग्निवीर योजना व्यवस्था में बदलाव किया है. 75 फीसदी अग्निवीरों को 2 साल का अतिरिक्त सेवा कार्यकाल देने का फैसला किया गया है. इसके बाद उनकी इच्छा और तय चयन प्रक्रिया के आधार पर नियमित सैनिक बनने का अवसर भी मिलेगा. यानी चार साल बाद बाहर होने की चिंता के बीच सरकार ने सेवा में बने रहने का एक अतिरिक्त रास्ता खोला है. इसे युवाओं की अपेक्षाओं और अग्निवीर योजना को लेकर उठ रहे सवालों के जवाब के तौर पर भी देखा जा रहा है.

किस राज्य में कितने पूर्व सैनिक?

Gen-Z के साथ-साथ इस फैसले का असर उन परिवारों तक भी पहुंचता है, जिनकी पीढ़ियों का सेना से जुड़ाव रहा है. 2027 में चुनाव वाले 5 राज्यों में पूर्व और वर्तमान सैनिकों की संख्या इस सामाजिक आधार को समझने में मदद करती है. उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में 4 लाख 26 हजार से ज्यादा, पंजाब में करीब 3 लाख 83 हजार और उत्तराखंड में करीब 1 लाख 40 हजार पूर्व सैनिक हैं.

गोवा में 2 हजार 389 और मणिपुर में 8 हजार 744 पूर्व सैनिक दर्ज हैं. यानी इन पांच राज्यों में करीब 9 लाख 60 हजार पूर्व सैनिक हैं. वहीं आंकड़ों के मुताबिक, सेना में जेसीओ और अन्य रैंक के जवानों की संख्या उत्तर प्रदेश में करीब 1 लाख 63 हजार, पंजाब में 90 हजार और उत्तराखंड में करीब 60 हजार से जायदा है . 

किस राज्य में कितने युवा मतदाता?

अगर युवा मतदाताओं की बात करें तो उत्तर प्रदेश में 18 से 19 साल के करीब 17 लाख 63 हजार युवा मतदाता हैं. पंजाब में करीब 2 लाख 93 हजार और उत्तराखंड में करीब 72 हजार हैं. गोवा में यह संख्या करीब 14 हजार है. मणिपुर के CEO पोर्टल पर 43 हजार 732 युवा मतदाताओं का आंकड़ा दर्ज है. इनमें से बड़ी संख्या ऐसे युवाओं की है, जिनके सामने पढ़ाई के बाद रोजगार और सुरक्षित करियर का सवाल है.

सेना में भर्ती की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए अग्निवीर योजना का बदलाव सीधे भविष्य से जुड़ा है. हालांकि सरकार का दावा है कि इस योजना के लिए पहले ही कहा गया था कि इसका रिव्यूज़ करके आगे इस पर फैसले लिए जाएंगे .

सरकार के सामने चुनौती

सरकार के सामने चुनौती लगातार युवा मतदाताओं को साधने की है और ऐसे में विपक्ष बेरोजगारी और अग्निवीर योजना के जरिए सरकार को घेर रहा था. आगामी साल के शुरुआत में उत्तराखंड,यूपी और पंजाब जैसे राज्यों में विधानसभा चुनाव होने है और इन राज्यों से अच्छी संख्या में युवा सेना में भर्ती होते है. ऐसे में विपक्ष अग्निवीर योजना को एक बड़ा मुद्दा चुनावों में बनाने की तैयारी कर रहा था. लेकिन सरकार ने चुनाव से पहले अग्निवीर योजना में बड़ा बदलाव करके एक बड़ा मुद्दा विपक्ष के हाथ से खींच लिया है.