केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कुरियन के राज्यसभा कार्यकाल समाप्त होने और भाजपा द्वारा उन्हें दोबारा उच्च सदन नहीं भेजने के फैसले के बाद केरल के प्रतिनिधित्व को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं. अब सवाल यह है कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली केंद्रीय मंत्रिपरिषद में केरल को नया प्रतिनिधि मिलेगा.

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जॉर्ज कुरियन ने मंगलवार को अपना इस्तीफा सौंप दिया, जिसे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने स्वीकार कर लिया. सूत्रों के अनुसार, कुरियन अब संगठनात्मक जिम्मेदारियों में लौट सकते हैं. उन्होंने स्वयं भी केरल में संगठन के लिए काम करने की इच्छा जताई है. भाजपा ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर कोई जिम्मेदारी दी जाएगी या राज्य संगठन में भूमिका सौंपी जाएगी.

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कुरियन की एंट्री

1980 में भाजपा के गठन के समय से ही पार्टी से जुड़े कुरियन को जून 2024 में मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा अल्पसंख्यक मामलों के राज्य मंत्री के रूप में शामिल किया गया था.उस समय उनका मंत्री बनना इसलिए भी चर्चा का विषय रहा था, क्योंकि वे संसद के किसी भी सदन के सदस्य नहीं थे. बाद में अगस्त 2024 में उन्हें मध्य प्रदेश से राज्यसभा भेजा गया था. यह सीट केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के लोकसभा सदस्य बनने के बाद खाली हुई थी.

राज्यसभा का सफर भाजपा द्वारा राज्यसभा का कार्यकाल नहीं बढ़ाए जाने के साथ ही कुरियन ऐसे चौथे नेता बन गए हैं, जो केरल से केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल हुए लेकिन दूसरा कार्यकाल हासिल नहीं कर सके. इससे पहले ओ. राजगोपाल, के.जे. अल्फोंस और वी. मुरलीधरन भी राज्यसभा के जरिए संसद पहुंचे थे और बाद में केंद्रीय मंत्री बने थे.पेशे से वकील कुरियन ने सुप्रीम कोर्ट में भी प्रैक्टिस की है. वे भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य, कोर कमेटी सदस्य और पार्टी प्रवक्ता जैसे कई महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं. 

दूसरा कार्यकाल नहींओ. राजगोपाल केंद्रीय मंत्री थे, तब कुरियन उनके विशेष कार्याधिकारी (ओएसडी) के रूप में भी काम कर चुके हैं. केरल की राजनीति में उनका चुनावी सफर सफल नहीं रहा. उन्होंने कई विधानसभा चुनाव लड़े, जिनमें हालिया चुनाव में कंजीरापल्ली सीट से भी किस्मत आजमाई, लेकिन जीत हासिल नहीं कर सके.फिलहाल केंद्र सरकार में केरल से भाजपा के एकमात्र मंत्री अभिनेता से राजनेता बने सुरेश गोपी हैं, जिन्होंने त्रिशूर लोकसभा सीट से ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी.अब राजनीतिक हलकों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या भाजपा के राज्यसभा उम्मीदवार सी. सदानंदन मास्टर को केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह मिलती है या फिर मोदी कैबिनेट में केरल का प्रतिनिधित्व केवल एक मंत्री तक ही सीमित रहेगा.

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