लद्दाख वार्ता पर तंज के लिए सोनम वांगचुक ने शेयर किया कॉमेडियन जसपाल भट्टी का Video
सोनम वांगचुक ने एक्स पर पोस्ट करते हुए इस बैठक को लेकर कई बातें सामने रखी हैं. उन्होंने कहा कि वह लद्दाख के मुख्य नेताओं और नई दिल्ली में एमएचए की सब कमेटी के बीच हुई बातचीत से बेहद ही निराश हैं.

जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने MHA की सब कमेटी के साथ हुई बातचीत को बेहद ही निराशाजनक करार दिया है. उन्होंने बकायदा एक्स पर पोस्ट करते हुए इस बैठक को लेकर कई बातें सामने रखी हैं. उन्होंने कहा कि वह लद्दाख के मुख्य नेताओं और नई दिल्ली में एमएचए की सब कमेटी के बीच हुई बातचीत से बेहद ही निराश हैं.
क्लिप के जरिए तंज
उन्होंने बकायदा तंज कसते हुए मशहूर कॉमेडियन जसपाल भट्टी के शो का पुराना क्लिप शेयर किया है. साथ ही कहा है कि बातचीत के दौरान शायद ही कुछ नया हुआ हो.
वांगचुक ने एक्स पर पोस्ट करते हुए उन्होंने लेह की एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस के नेता नई दिल्ली के लद्दाख भवन में शाम 4 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस करने की बात कही है. साथ ही बताया कि 9 सितंबर को नई दिल्ली में हुई सब कमेटी लेवल की बैठक से वह काफी निराश थे. इस बैठक को एमएचए ने बुधवार को लद्दाख को राज्य का दर्जा और संवैधानिक सुरक्षा की मांगों को लेकर बुलाई थी.
LADAKH LEADERS CALL A PRESS CONFERENCE
— Sonam Wangchuk (@Wangchuk66) September 10, 2026
AT 4pm, LADAKH BHAVAN, NEW DELHI
Leaders of Apex Body of Leh & Kargil Democratic Alliance are rather disappointed by the Sub Committee level meeting in New Delhi on 9th Sept.
There was hardly anything new beyond the last meeting four months… pic.twitter.com/NFSFLW6PKG
बातचीत पर निराशा
वांगचुक ने कहा है कि चार महीने पहले हुई पिछली बैठक के बाद शायद ही कुछ नया हुआ हो. चर्चा के लिए एमएचए ने कोई ड्राफ्ट तैयार नहीं किया है. लद्दाख की तरफ से एक महीने पहले भेजी गई, नॉन नेगोशिएबल मांगों की लिस्ट का कोई जवाब नहीं दिया गया और न ही किसी तरह का भरोसा दिलाया गया कि एक वैध लोकतांत्रिक विधानसभा के बनने से पहले स्थानीय शासन, जमीन ट्रांसफर पॉलिसी आदि में किसी तरह का बड़ा और न बदला जा सकने वाला बदलाव नहीं किया जाएगा.
उन्होंने कहा कि बैठक का एकमात्र बड़ा नतीजा, शायद अक्टूबर में अगली बैठक की तरीख तय करना था. वांगचुक ने भट्टी के फ्लॉप शो का एक क्लिप शेयर कते हुए कहा, इसलिए आज हमें मशहूर कॉमेडियन जसपाल भट्टी की बैठकों की याद आ रही है.
बैठक के बाद दोनों संगठनों ने 19 से 24 सितंबर तक कारगिल से लेह तक पदयात्रा करने का फैसला किया है. संगठनों का कहना है कि अगर सरकार की ओर से उनकी मांगों पर ठोस भरोसा और आश्वासन नहीं मिला तो आंदोलन आगे बढ़ाया जाएगा.
ड्राफ्ट की उम्मीद थी लेकिन नहीं मिला
LAB और KDA के प्रतिनिधियों के मुताबिक उन्हें उम्मीद थी कि बैठक में लद्दाख के लिए प्रस्तावित चुनी हुई UT-स्तरीय संस्था को लेकर कोई ठोस ड्राफ्ट सामने आएगा. उनका कहना है कि पहले की बातचीत में इस व्यवस्था को लेकर सैद्धांतिक सहमति बनी थी लेकिन 9 सितंबर की बैठक में ऐसा कोई ड्राफ्ट पेश नहीं किया गया. सोनम वांगचुक ने बैठक के बाद कहा कि मई में हुई बातचीत के बाद उन्हें उम्मीद थी कि इस बार आगे की प्रक्रिया स्पष्ट होगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ.
Article 371 के तहत अलग मॉडल पर चर्चा
दूसरी तरफ लद्दाख के मुख्य सचिव आशीष कुंद्रा ने बैठक के बाद कहा कि माहौल सकारात्मक रहा. उन्होंने बताया कि बैठक में संविधान के अनुच्छेद 371 के तहत लद्दाख के लिए एक विशेष यानी ‘sui-generis’ शासन मॉडल की व्यापक रूपरेखा पर चर्चा हुई. कुंद्रा ने कहा कि बैठक का उद्देश्य लद्दाख में लोकतांत्रिक व्यवस्था को और मजबूत करना है. वे 2026 की शुरुआत में लद्दाख के मुख्य सचिव का पद संभाल चुके हैं.
कुछ मांगों पर समझौता नहीं
LAB और KDA ने गृह मंत्रालय को अपनी मांगों की एक सूची दी है. प्रतिनिधियों के मुताबिक इसमें कुछ मुद्दों को ‘नॉन-नेगोशिएबल’ यानी ऐसे मुद्दे बताया गया है जिन पर समझौता नहीं किया जाएगा. इनमें प्रस्तावित नई व्यवस्था में होम अफेयर्स और कानून-व्यवस्था से जुड़े अधिकारों को रखने की मांग भी शामिल है. प्रतिनिधियों का कहना है कि उन्हें सिर्फ किसी ड्राफ्ट की घोषणा नहीं बल्कि लद्दाख के हितों को लेकर स्पष्ट राजनीतिक भरोसा चाहिए.
उन्होंने यह भी कहा कि जब तक नई चुनी हुई व्यवस्था नहीं बनती तब तक लद्दाख में ऐसे बड़े और अपरिवर्तनीय फैसले नहीं लिए जाने चाहिए जो भविष्य की व्यवस्था को प्रभावित कर सकते हैं.
बैठक को लेकर भी उठे सवाल
प्रतिनिधियों ने बैठक के समय और उसके उद्देश्य पर भी सवाल उठाए. उनका कहना है कि अगर सरकार के पास कोई ठोस प्रस्ताव नहीं था तो बैठक इसी समय क्यों बुलाई गई.
प्रतिनिधियों के मुताबिक उन्हें उम्मीद थी कि बातचीत के जरिए आंदोलन की जरूरत खत्म हो जाएगी. लेकिन ठोस प्रगति नहीं होने के बाद उन्होंने पदयात्रा आगे बढ़ाने का फैसला किया.
19 से 24 सितंबर तक होगी पदयात्रा
LAB और KDA अब 19 सितंबर से कारगिल से लेह तक पदयात्रा निकालेंगे. यह यात्रा 24 सितंबर को लेह में खत्म होगी. 24 सितंबर की तारीख इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले साल इसी दिन लेह में एक प्रदर्शन के दौरान हिंसा हुई थी. उस घटना में चार लोगों की मौत हुई थी और कई लोग घायल हुए थे. इसके बाद केंद्र और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत का सिलसिला भी प्रभावित हुआ था.
जांच आयोग की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग
लद्दाख के प्रतिनिधियों ने पिछले साल 24 सितंबर की हिंसा की जांच के लिए बनाए गए आयोग की रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग भी दोहराई है. उनका कहना है कि जब तक हिंसा से जुड़े मुद्दों पर न्याय, मुआवजे और जांच रिपोर्ट को लेकर स्पष्टता नहीं आती तब तक आंदोलन खत्म करना मुश्किल होगा.
2019 से चल रहा है आंदोलन
अगस्त 2019 में लद्दाख को जम्मू-कश्मीर से अलग कर केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया था. लद्दाख में विधानसभा नहीं बनाई गई. इसके बाद से LAB और KDA लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व और संवैधानिक सुरक्षा की मांग को लेकर केंद्र के साथ बातचीत कर रहे हैं.
इनकी प्रमुख मांगों में UT स्तर पर चुनी हुई संस्था, संवैधानिक सुरक्षा, जमीन और संस्कृति की सुरक्षा, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और लद्दाख के लोगों के अधिकारों की गारंटी शामिल हैं. केंद्र और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच 2021 से बातचीत के कई दौर हो चुके हैं.
फिलहाल 9 सितंबर की बैठक के बाद दोनों पक्षों के बयानों में अंतर साफ दिख रहा है. प्रतिनिधि जहां इसे ठोस नतीजे के बिना खत्म हुई बैठक बता रहे हैं वहीं लद्दाख प्रशासन इसे बातचीत में आगे बढ़ने की प्रक्रिया के तौर पर देख रहा है. ऐसे में अब नजर 19 सितंबर से शुरू होने वाली कारगिल-लेह पदयात्रा और अगले दौर की बातचीत पर है.





















